दिल्ली। जनकपुरी इलाके में जोगिंदर सिंह मार्ग पर हुआ हादसा सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि सरकारी तंत्र की घोर लापरवाही का दर्दनाक उदाहरण बन गया है।
पौड़ी जिले, उत्तराखंड के रहने वाले 25 वर्षीय कमल ध्यानी की एक खुले पड़े करीब 20 फुट गहरे गड्ढे में गिरने से मौत हो गई।
जानकारी के अनुसार यह गड्ढा दिल्ली जल बोर्ड द्वारा पाइपलाइन बिछाने के कार्य के लिए खोदा गया था।
हैरानी की बात यह रही कि इतने गहरे गड्ढे के आसपास न तो कोई मजबूत बैरिकेडिंग की गई थी और न ही किसी तरह की चेतावनी पट्टिका लगाई गई थी। अंधेरे या कम रोशनी के कारण कमल को गड्ढे का अंदाजा नहीं हो पाया और वह सीधे उसमें गिर गया।
स्थानीय लोगों ने जब हादसा होते देखा तो तुरंत पुलिस और एंबुलेंस को सूचना दी, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। गंभीर हालत में अस्पताल पहुंचाए जाने पर डॉक्टरों ने कमल को मृत घोषित कर दिया।
कमल ध्यानी रोज़गार के सिलसिले में दिल्ली आया था। उसकी असमय मौत की खबर जैसे ही उत्तराखंड स्थित उसके गांव पहुंची, पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई।
परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है और परिजनों ने प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि दिल्ली में जगह-जगह इस तरह के खुले गड्ढे आम हो गए हैं, लेकिन संबंधित विभाग न तो समय पर काम पूरा करता है और न ही सुरक्षा के मानकों का पालन करता है।
यह हादसा एक बार फिर यह सवाल खड़ा करता है कि क्या आम नागरिकों की जान की कीमत इतनी सस्ती है?
फिलहाल पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। दिल्ली जल बोर्ड की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
अब देखना होगा कि कमल की मौत को सिर्फ “दुर्घटना” मानकर भुला दिया जाता है या फिर यह सिस्टम को जगाने वाली घटना साबित होती है।














