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हल्द्वानी। भैरव चौक क्षेत्र में अतिक्रमण और पीड़ित पहाड़ी फौजी परिवारों के अधिकारों को लेकर पहाड़ी आर्मी उत्तराखंड ने मंगलवार को सांकेतिक धरना प्रदर्शन किया।

यह धरना संगठन के नगर अध्यक्ष फौजी भुवन चंद्र पाण्डेय के नेतृत्व में भैरव चौक, हल्द्वानी बाजार में आयोजित किया गया, जिसमें पीड़ित पहाड़ी परिवारों ने भी भाग लिया।

नगर अध्यक्ष फौजी भुवन चंद्र पाण्डेय ने आरोप लगाया कि भैरव चौक क्षेत्र में तीन पहाड़ी परिवारों को उनकी दुकानों और मकानों से साजिशन वंचित किया गया है।

उन्होंने बताया कि कोरोना काल के दौरान आग लगने के बाद इन परिवारों को केवल मरम्मत के नाम पर मकान और दुकान खाली कराए गए, लेकिन बाद में पूरी जमीन और भवन किसी अन्य व्यक्ति को बेच दिए गए।

आरोप है कि संबंधित भूमि नजूल की थी, इसके बावजूद उसकी रजिस्ट्री कर दी गई और बाद में वहां एक आलीशान होटल खड़ा कर नीचे की दुकानें अलग-अलग लोगों को बेच दी गईं।

उन्होंने कहा कि पीड़ित परिवारों ने जिला विकास प्राधिकरण, कुमाऊँ आयुक्त, तहसील, एसडीएम, जिलाधिकारी और मुख्यमंत्री तक न्याय की गुहार लगाई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

जबकि अगस्त 2023 में कुमाऊँ आयुक्त और जिला विकास प्राधिकरण सचिव द्वारा अतिक्रमण ध्वस्तीकरण के आदेश जारी किए जा चुके हैं। इसके बावजूद कार्रवाई न होने से पीड़ित परिवारों में गहरा आक्रोश और निराशा है।

धरने में यह भी बताया गया कि पीड़ितों में एक परिवार ऐसा है, जिसके मुखिया ने 1962, 1965 और 1971 के युद्धों में देश की सेवा की थी, बावजूद इसके उनके परिवार को न्याय नहीं मिल पा रहा है। पहाड़ी आर्मी ने आरोप लगाया कि सरकार मंचों से सैनिकों के सम्मान की बातें करती है, लेकिन जमीन पर उनके परिवारों को उनका हक दिलाने में विफल साबित हो रही है। संगठन ने दावा किया कि ये परिवार वर्ष 1958 से इस स्थान पर रहकर व्यवसाय कर रहे थे और उन्हें साजिश के तहत हटाया गया।

पहाड़ी आर्मी उत्तराखंड ने चेतावनी दी कि यदि तीन दिनों के भीतर अतिक्रमण के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो संगठन भैरव चौक में बड़े स्तर पर धरना-प्रदर्शन करेगा।

इस मौके पर पहाड़ी आर्मी के जिला अध्यक्ष राजेंद्र कांडपाल ने पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने के लिए उनके साथ मजबूती से खड़े रहने का भरोसा दिलाया। वहीं महिला नगर अध्यक्ष कविता जीना ने सवाल उठाया कि जब कुमाऊँ आयुक्त द्वारा ध्वस्तीकरण के आदेश जारी किए जा चुके हैं, तो अब तक अतिक्रमण क्यों नहीं हटाया गया।

पीड़ित पक्ष की ओर से दीपा बोरा, मोहन कांडपाल और आनंद बिष्ट ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि प्रशासन को इतने नजदीक स्थित इतना बड़ा अतिक्रमण दिखाई नहीं देता, जबकि आम आदमी के छोटे निर्माण पर तुरंत बुलडोजर चल जाता है।

उन्होंने मांग रखी कि या तो पूरा अतिक्रमण ध्वस्त कर जमीन सरकार अपने कब्जे में ले, या फिर वहां पहाड़ी लोगों के लिए एक विश्रामगृह बनाया जाए, जिससे पहाड़ से इलाज के लिए आने वाले लोगों को बेस अस्पताल और सुशीला तिवारी अस्पताल में सुविधा मिल सके।

धरना प्रदर्शन में पहाड़ी आर्मी के प्रदीप रौतेला, कृष्णा आर्या सहित कई स्थानीय लोग और संगठन के सदस्य मौजूद रहे।

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