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मां ने दी बेटे के मौत की सुपारी: 14 करोड़ की प्रॉपर्टी डील बनी खून की वजह: उत्तराखंड में गैस एजेंसी संचालक की हत्या का सनसनीखेज खुलासा

देहरादून। राजधानी के तिब्बती मार्केट क्षेत्र में दिनदहाड़े गैस एजेंसी संचालक अर्जुन शर्मा की हत्या के मामले में पुलिस ने चौंकाने वाला खुलासा किया है।

जांच में सामने आया है कि 14 करोड़ रुपये की प्रॉपर्टी डील, पारिवारिक विवाद और आर्थिक दबाव ने मिलकर इस वारदात को साजिशन हत्या में बदल दिया।

14 करोड़ की डील और 8 करोड़ एडवांस

पुलिस के अनुसार अर्जुन शर्मा की मां बीना शर्मा ने जीएमएस रोड स्थित अपनी संपत्ति का 14 करोड़ रुपये में एग्रीमेंट डॉक्टर अजय खन्ना से किया था। इस सौदे के तहत करीब 8 करोड़ रुपये एडवांस के रूप में दिए जा चुके थे। लेकिन अर्जुन शर्मा ने संपत्ति पर कानूनी स्टे ले लिया, जिससे रजिस्ट्री और कब्जा दोनों अटक गए।

एग्रीमेंट की शर्तों के मुताबिक सौदा निरस्त होने की स्थिति में एडवांस रकम दोगुनी लौटानी थी। इसी को लेकर डॉक्टर अजय खन्ना बीना शर्मा पर लगातार दबाव बना रहे थे। इससे मां-बेटे के बीच तनाव बढ़ता गया।

आर्थिक दबाव से रची गई साजिश

जांच में खुलासा हुआ कि आर्थिक दबाव से निकलने और सौदा आगे बढ़ाने के लिए बीना शर्मा, डॉक्टर अजय खन्ना और विनोद उनियाल ने अर्जुन शर्मा को रास्ते से हटाने की साजिश रची। हत्या की सुपारी विनोद उनियाल के ड्राइवर पंकज राणा और उसके भाई राजीव राणा को 12 लाख रुपये में दी गई। तीन लाख रुपये एडवांस के रूप में दे दिए गए थे, शेष रकम हत्या के बाद देने की योजना थी।

भीड़भाड़ वाले इलाके में मारी गई गोली

बुधवार को तिब्बती मार्केट के व्यस्त इलाके में अर्जुन शर्मा की गोली मारकर हत्या कर दी गई, जिससे पूरे शहर में दहशत फैल गई। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपियों की पहचान कर पूरे षड्यंत्र का पर्दाफाश कर दिया।

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अजय सिंह ने पत्रकार वार्ता में बताया कि मृतक की मां बीना शर्मा, डॉक्टर अजय खन्ना और विनोद उनियाल को गिरफ्तार कर लिया गया है। शूटर पंकज राणा और राजीव राणा पहले ही पुलिस की गिरफ्त में हैं। सभी आरोपियों से पूछताछ जारी है।

एसएसपी अजय सिंह ने यह भी स्पष्ट किया कि विनोद उनियाल की पत्नी के खिलाफ फिलहाल कोई ठोस साक्ष्य नहीं मिले हैं, इसलिए उनकी गिरफ्तारी नहीं की गई है।

यह मामला सिर्फ एक हत्या नहीं, बल्कि संपत्ति, लालच और पारिवारिक रिश्तों के टूटने की दर्दनाक कहानी बनकर सामने आया है, जिसने देहरादून की कानून-व्यवस्था और सामाजिक मूल्यों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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