देहरादून में गैंग्स्टर की हत्या से पुलिस पर उठे सवाल, खुफिया तंत्र और लाइसेंस व्यवस्था जांच के घेरे में
देहरादून। राजधानी में शुक्रवार को हुए गैंग्स्टर विक्रम शर्मा हत्याकांड ने कानून-व्यवस्था और पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
बताया जा रहा है कि विक्रम शर्मा लंबे समय से देहरादून के रायपुर क्षेत्र स्थित ग्रीन व्यू रेजीडेंसी, अमन विहार में रह रहा था, लेकिन स्थानीय पुलिस और खुफिया तंत्र को इसकी भनक तक नहीं लगी।
सूत्रों के अनुसार, विक्रम का बाजपुर में स्टोन क्रशर संचालित है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि आपराधिक पृष्ठभूमि के व्यक्ति को स्टोन क्रशर का लाइसेंस किस आधार पर दिया गया। स्टोन क्रशर स्थापित करने के लिए बड़े भू-क्षेत्र और कई प्रशासनिक स्वीकृतियों की आवश्यकता होती है। यदि आरोपी पर संगीन मुकदमे दर्ज थे, तो लाइसेंस जारी होने की प्रक्रिया भी जांच के दायरे में आ सकती है।
बताया जा रहा है कि विक्रम शर्मा के पास लाइसेंसी पिस्टल भी थी, जिसे वह हमेशा साथ रखता था। इसके बावजूद शूटरों ने उसे गोलियों से भून दिया और फरार हो गए। इस घटना ने पुलिस की निगरानी व्यवस्था और अपराधियों की गतिविधियों पर नियंत्रण को लेकर प्रश्न खड़े कर दिए हैं।
इससे पहले तिब्बती मार्केट क्षेत्र में भी भीड़भाड़ के बीच एक कारोबारी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। उस घटना को 48 घंटे भी नहीं बीते थे कि शहर के पॉश इलाके सिल्वर सिटी में गैंग्स्टर की हत्या कर दी गई। लगातार हो रही इन घटनाओं से यह संदेश जा रहा है कि अपराधियों के मन में पुलिस का भय कम हो गया है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि बिना नंबर प्लेट वाले वाहनों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं हो रही है, जिसका फायदा अपराधी उठा रहे हैं। सीसीटीवी फुटेज में वाहन दिखने के बावजूद नंबर प्लेट न होने से आरोपियों तक पहुंचना कठिन हो जाता है।
वहीं, आम नागरिकों का कहना है कि पुलिस ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन पर चालान तो कर रही है, लेकिन संगठित अपराध और अपराधियों की निगरानी में अपेक्षित सख्ती नजर नहीं आ रही।
फिलहाल पुलिस मामले की जांच में जुटी है और हमलावरों की तलाश जारी है। हत्याकांड के बाद सुरक्षा व्यवस्था को लेकर शहर में चिंता का माहौल है।














