ब्रेकिंग न्यूज़
खबर शेयर करे -

कैंची धाम में अनियंत्रित निर्माण पर हाईकोर्ट सख्त, स्वतः संज्ञान लेकर सरकार से मांगा जवाबश्रद्धालुओं की भीड़ के बीच बढ़ी अव्यवस्था, हाईकोर्ट ने लिया स्वतः संज्ञान

रिपोर्टर: गुड्डू सिंह ठठोला

नैनीताल। उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने कैंची धाम और आसपास क्षेत्र में हो रहे अनियंत्रित निर्माण व आर्थिक अनियमितताओं के मामले में सख्त रुख अपनाया है। न्यायालय को प्राप्त एक पत्र के आधार पर मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता एवं न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने प्रकरण में सुओ मोटो कॉग्निजेंस (स्वतः संज्ञान) लेते हुए राज्य सरकार से जवाब तलब किया है।

न्यायालय ने अधिवक्ता धर्मेंद्र बर्थवाल को मामले में एमिकस क्यूरी (न्याय मित्र) नियुक्त किया है, जो अदालत की सहायता करेंगे।

बताया गया है कि कैंची धाम और उसके आसपास पिछले कुछ वर्षों में श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या के चलते अव्यवस्थाएं बढ़ गई हैं। ट्रैफिक जाम, अतिक्रमण, अनियोजित व्यावसायिक निर्माण, सीवेज समस्या और नो-पार्किंग जैसी दिक्कतें क्षेत्र में गंभीर रूप लेती जा रही हैं।

शिकायतकर्ता पिथौरागढ़ निवासी ठाकुर सिंह डसीला द्वारा भेजे गए पत्र में इन अनियमितताओं की ओर न्यायालय का ध्यान आकर्षित किया गया था। मामले में प्रमुख सचिव लोक निर्माण विभाग, परिवहन सचिव, उत्तराखंड पर्यावरण संरक्षण बोर्ड के अध्यक्ष, जिलाधिकारी एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक समेत संबंधित अधिकारियों को पक्षकार बनाया गया है।

गौरतलब है कि कैंची धाम ट्रस्ट ने पूर्व में राज्य में आई प्राकृतिक आपदाओं के दौरान मुख्यमंत्री को 2.50 करोड़ रुपये की सहायता प्रदान की थी। साथ ही, बी.डी. पांडे अस्पताल को अत्याधुनिक एक्स-रे और अल्ट्रासाउंड मशीन भी दान की गई थी।

अब देखना होगा कि न्यायालय के हस्तक्षेप के बाद क्षेत्र में बढ़ती अव्यवस्थाओं पर किस प्रकार प्रभावी कार्रवाई होती है।

यह भी पढ़ें :  नैनीताल में Operation Crackdown: 335 लोगों का सत्यापन, 53 पर पुलिस एक्ट में कार्रवाई
error: Content is protected !!