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कैंची धाम से जुड़ी याचिका हाईकोर्ट पहुंची, डीएम से मांगा ब्यौरा; ट्रस्ट ने कहा—पहले सुना जाए पक्ष

रिपोर्टर: गुड्डू सिंह ठठोला

नैनीताल। विश्वविख्यात कैंची धाम के यातायात प्रबंधन, निर्माण कार्यों और ट्रस्ट की गतिविधियों को लेकर मामला उत्तराखंड हाईकोर्ट पहुंच गया है। न्यायालय ने नैनीताल के जिलाधिकारी से पूरे प्रकरण पर विस्तृत ब्यौरा मांगा है तथा मामले में न्याय मित्र नियुक्त किया है। साथ ही सभी पक्षों को नोटिस जारी कर 18 मार्च तक जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।

यह याचिका पिथौरागढ़ निवासी ठाकुर सिंह डसीला द्वारा मुख्य न्यायाधीश को लिखे गए पत्र के आधार पर जनहित याचिका के रूप में स्वीकार की गई। पत्र में ट्रस्ट के प्रबंधन, संभावित वित्तीय अनियमितताओं, यातायात व्यवस्था की खामियों और आसपास कथित अवैध निर्माण को लेकर सवाल उठाए गए हैं।

ट्रस्ट ने मांगा पक्ष रखने का अवसर

वहीं कैंची धाम ट्रस्ट ने न्यायालय में प्रार्थना पत्र दाखिल कर अनुरोध किया है कि उन्हें मामले में पक्षकार बनाया जाए और जब तक उनका पक्ष न सुना जाए, तब तक कोई आदेश पारित न किया जाए।

ट्रस्ट की ओर से अधिवक्ता राजीव बिष्ट मीडिया के समक्ष आए और उन्होंने स्पष्ट किया कि कैंची धाम ट्रस्ट वर्ष 1974 से विधिवत पंजीकृत है। उनके अनुसार, चैरिटेबल एंडोमेंट एक्ट 1890 के तहत 6 मार्च 1974 को तत्कालीन उत्तर प्रदेश राज्यपाल द्वारा धाम की संपत्ति ट्रस्ट के नाम गजट अधिसूचना के माध्यम से दर्ज की गई थी। तब से अब तक ट्रस्ट के 13 सदस्य बदलते रहे हैं और सरकार द्वारा प्रतिवर्ष ऑडिट कराया जाता है। 31 मार्च 2024 तक का ऑडिट पूरा हो चुका है तथा आयकर रिटर्न भी नियमित रूप से दाखिल किया जाता है।

उन्होंने यह भी बताया कि मंदिर में प्राप्त चढ़ावे की गिनती भारतीय स्टेट बैंक की टीम ट्रस्ट के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में करती है और राशि सीधे बैंक में जमा कराई जाती है। ट्रस्ट ने आरोपों को निराधार और तथ्यहीन बताया है।

सोशल मीडिया पर भ्रामक खबरों का आरोप

ट्रस्ट के अधिवक्ता ने कुछ सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, न्यूज़ पोर्टल और यूट्यूब चैनलों पर बिना पुष्टि के भ्रामक खबरें प्रसारित करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि न्यायालय में मामला लंबित होने के दौरान अपुष्ट और गलत जानकारी प्रसारित करना न्यायालय की अवमानना की श्रेणी में आ सकता है। मीडिया से उन्होंने तथ्यात्मक और प्रमाणित खबरें ही प्रकाशित करने की अपील की है।

अगली सुनवाई 18 मार्च को

उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार और संबंधित पक्षों से 18 मार्च तक जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 18 मार्च को निर्धारित की गई है।

अब सभी की निगाहें इस महत्वपूर्ण सुनवाई पर टिकी हैं, जिसमें कैंची धाम से जुड़े आरोपों और ट्रस्ट के पक्ष पर न्यायालय का रुख स्पष्ट होगा।

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