नैनीताल। प्रकृति और मानव जीवन के बीच अटूट संबंध को रेखांकित करने के उद्देश्य से हर वर्ष 21 मार्च को विश्व वानिकी दिवस (अंतर्राष्ट्रीय वन दिवस) मनाया जाता है।
यह दिवस वनों के महत्व के प्रति जनजागरूकता बढ़ाने और वन संरक्षण के लिए वैश्विक स्तर पर सामूहिक प्रयासों को प्रोत्साहित करने के लिए समर्पित है।
इस वर्ष विश्व वानिकी दिवस 2026 की थीम “वन और अर्थव्यवस्थाएं” रखी गई है, जो यह दर्शाती है कि वन केवल पर्यावरणीय संतुलन ही नहीं बल्कि आर्थिक समृद्धि, आजीविका और हरित अर्थव्यवस्था के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। संयुक्त राष्ट्र द्वारा स्थापित यह दिवस सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति और जलवायु परिवर्तन से निपटने में वनों की भूमिका को रेखांकित करता है।
वनों को पृथ्वी के फेफड़े कहा जाता है, क्योंकि वे कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित कर प्राणवायु (ऑक्सीजन) प्रदान करते हैं और जलवायु को नियंत्रित करते हैं। विश्व की लगभग 80 प्रतिशत स्थलीय जैव विविधता वनों में पाई जाती है, जबकि 75 प्रतिशत ताजे जल का स्रोत भी वन ही हैं। इसके अलावा वन मिट्टी के कटाव को रोकते हैं और करोड़ों लोगों की आजीविका का आधार हैं।
भारत वन स्थिति रिपोर्ट 2023 के अनुसार देश का कुल वन और वृक्ष आवरण 8,27,357 वर्ग किलोमीटर है, जो देश के भौगोलिक क्षेत्र का 25.17 प्रतिशत है। वर्ष 2021 की तुलना में इसमें 1,445 वर्ग किलोमीटर की वृद्धि दर्ज की गई है। देश में सबसे अधिक वन क्षेत्र मध्य प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश और छत्तीसगढ़ में है, जबकि प्रतिशत के हिसाब से मिजोरम, अरुणाचल प्रदेश और मेघालय शीर्ष पर हैं।
रिपोर्ट के अनुसार लगभग 35.46 प्रतिशत वन क्षेत्र आग की चपेट में आने की संभावना रखते हैं, जो वन संरक्षण के लिए गंभीर चुनौती है। वहीं देश का कुल कार्बन स्टॉक बढ़कर 7,204 मिलियन टन हो गया है, जो जलवायु परिवर्तन से लड़ाई में सकारात्मक संकेत है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 2030 तक वनों की कटाई रोकने और अवक्रमित भूमि को पुनः वन क्षेत्र में बदलने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके तहत विश्व स्तर पर 350 मिलियन हेक्टेयर भूमि को पुनर्स्थापित करने की योजना है, जबकि भारत ने भी 2030 तक 26 मिलियन हेक्टेयर बंजर भूमि को बहाल करने का संकल्प लिया है।
उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य में, जहां 65 प्रतिशत से अधिक क्षेत्र वनाच्छादित है, वहां वनाग्नि एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि वन संरक्षण के लिए स्थानीय समुदायों की भागीदारी और आधुनिक तकनीकों के उपयोग की आवश्यकता है।
भारतीय संस्कृति में भी वनों को जीवन का आधार माना गया है—
“वनं हि जीवनं ध्रुवं, सुखं चैव निरामयं”
अर्थात वन ही जीवन का स्थायी आधार हैं और सुख व स्वास्थ्य के स्रोत हैं।
विश्व वानिकी दिवस हमें यह संदेश देता है कि यदि पृथ्वी को सुरक्षित और समृद्ध बनाना है तो वनों का संरक्षण, संवर्धन और सतत प्रबंधन हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है।

