डालकन्या, पत्तलोट और छिड़ाखान क्षेत्र में नवयुवक मंगल दल ने किया निशुल्क पौधों का वितरण, ग्रामीणों ने रोजगार और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बताया महत्वपूर्ण कदम
ओखलकांडा/भीमताल। ग्राम पंचायत डालकन्या, पत्तलोट, छिड़ाखान सहित आसपास के तोकों में पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीणों को स्वरोजगार से जोड़ने के उद्देश्य से निशुल्क फलदार पौधों का वितरण किया गया। यह पौध वितरण कार्यक्रम पूर्व जिला आयुर्वेदिक अधिकारी एवं पर्यावरणविद् डॉ. आशुतोष पंथ के सहयोग से नवयुवक मंगल दल डालकन्या द्वारा आयोजित किया गया।
कार्यक्रम में ग्राम प्रधान रेखा पनेरु, मंगल दल अध्यक्ष चंदन पनेरु, समाजसेवी राजेश पनेरु, उप प्रधान करण पनेरु, दीपक, डूंगर तथा पूर्व प्रधान प्रतिनिधि संदीप आर्य सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे। ग्रामीणों ने पौधों को पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ भविष्य में रोजगार का बेहतर माध्यम बताते हुए उत्साह के साथ पौधे प्राप्त किए और उन्हें अपने घरों, खेतों एवं आसपास के क्षेत्रों में लगाने का संकल्प लिया।
ग्रामीणों का कहना है कि पहाड़ों से लगातार हो रहे पलायन के दौर में फलदार पौधों का रोपण भविष्य में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। यदि इन पौधों की उचित देखभाल की जाए तो आने वाले वर्षों में इनसे फल उत्पादन के साथ ग्रामीण परिवारों को अतिरिक्त आय का साधन मिल सकता है। यही कारण है कि क्षेत्र के लोग इस अभियान से उत्साहपूर्वक जुड़ रहे हैं।
38 वर्षों से निजी खर्च पर पौध वितरण
पर्यावरण संरक्षण के प्रति डॉ. आशुतोष पंथ की पहल लंबे समय से जारी है। बताया गया कि वह पिछले करीब 38 वर्षों से अपनी निजी धनराशि से नर्सरी से पौधे खरीदकर ग्रामीण क्षेत्रों में निशुल्क वितरित कर रहे हैं। बरसात के मौसम में प्रतिदिन करीब 400 से 600 पौधों का वितरण किया जाता है। वहीं सर्दियों में भी मौसम और सीजन के अनुरूप विभिन्न प्रजातियों के पौधे लोगों को उपलब्ध कराए जाते हैं।
अब तक डॉ. पंथ के सहयोग से उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र के पहाड़ी एवं मैदानी इलाकों में लगभग 4 लाख 82 हजार पौधे निशुल्क वितरित किए जा चुके हैं। उनका यह अभियान पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में फलदार पौधों के माध्यम से भविष्य में आजीविका के अवसर पैदा करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
पौधों की देखभाल का किया आह्वान
इस अवसर पर नवयुवक मंगल दल अध्यक्ष चंदन पनेरु ने ग्रामीणों से अपील की कि जो भी पौधे उन्हें वितरित किए गए हैं, उनकी केवल रोपाई ही न करें बल्कि नियमित रूप से उनकी देखरेख, सिंचाई और सुरक्षा भी सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि एक पौधा तभी वृक्ष बनेगा, जब उसकी जिम्मेदारी के साथ देखभाल की जाएगी।
उन्होंने ग्रामीणों से अधिक से अधिक फलदार पौधे लगाने का आह्वान करते हुए कहा कि आज लगाए गए पौधे आने वाले समय में पर्यावरण को हरा-भरा बनाने के साथ ही ग्रामीण परिवारों के लिए आय और रोजगार का साधन बन सकते हैं।
ग्रामीणों ने डॉ. आशुतोष पंथ के लंबे समय से चले आ रहे इस अभियान की सराहना करते हुए कहा कि पहाड़ों में पर्यावरण संरक्षण, हरियाली बढ़ाने और पलायन की चुनौती से निपटने के लिए इस तरह के प्रयासों को लगातार आगे बढ़ाने की जरूरत है।


