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सड़क के लिए तरसता बिलेख गांव, गधेरे पर पेड़ बिछाकर आवाजाही को मजबूर ग्रामीण

2016 में हो चुका है सड़क का जिओ, फिर भी निर्माण नहीं हुआ शुरू; हादसे में महिला के टूटे चार दांत, ग्रामीणों ने दी चुनाव बहिष्कार की चेतावनी

बागेश्वर। पहाड़ के गांवों के लिए सड़क महज आवागमन का साधन नहीं, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजमर्रा की जिंदगी की बुनियादी जरूरत है। इसके बावजूद बागेश्वर विधानसभा क्षेत्र का बिलेख गांव आज भी सड़क जैसी मूलभूत सुविधा से वंचित है।

सड़क के अभाव में ग्रामीणों को प्रतिदिन जोखिम भरे रास्तों से होकर आवाजाही करनी पड़ रही है। हालात इतने गंभीर हैं कि गांव तक पहुंचने के लिए ग्रामीणों को एक गधेरे को रोजाना करीब 15 से 16 बार पार करना पड़ता है।

बिलेख गांव जिला मुख्यालय से लगभग 16 किलोमीटर और रवांईखाल से करीब 8 किलोमीटर पैदल दूरी पर स्थित है। गधेरे पर न तो कोई सुरक्षित पुल बना है और न ही आवाजाही के लिए पक्का रास्ता। बरसात के दौरान ग्रामीण पेड़ गिराकर गधेरे के ऊपर अस्थायी रास्ता तैयार करते हैं और इसी के सहारे जान जोखिम में डालकर आवागमन करते हैं।

हादसे में महिला के टूटे चार दांत

इसी खतरनाक रास्ते से गुजरने के दौरान हाल ही में एक महिला हादसे का शिकार हो गई। रास्ते पर संतुलन बिगड़ने से वह गिर गई, जिससे उसके चार दांत टूट गए। इस घटना के बाद ग्रामीणों में आक्रोश है। उनका कहना है कि यह हादसा प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के लिए चेतावनी है कि गांव की समस्या को अब भी नजरअंदाज किया गया तो कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।

स्कूली बच्चों की जिंदगी भी खतरे में

बिलेख गांव के करीब 15 से 20 स्कूली बच्चे भी प्रतिदिन इसी जोखिम भरे रास्ते से स्कूल आते-जाते हैं। बरसात में गधेरे का जलस्तर बढ़ जाने पर बच्चों और ग्रामीणों के लिए खतरा कई गुना बढ़ जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार तेज बहाव के कारण गधेरे को पार करना मुश्किल हो जाता है, लेकिन जरूरी काम और बच्चों की पढ़ाई के कारण उन्हें मजबूरी में इसी रास्ते का इस्तेमाल करना पड़ता है।

2016 में हुआ सड़क का जिओ, अब तक नहीं बनी सड़क

ग्रामीणों के मुताबिक बिलेख गांव की सड़क के लिए वर्ष 2016 में ही जिओ यानी शासन स्तर पर प्रक्रिया शुरू हो चुकी थी, लेकिन करीब एक दशक बीतने के बावजूद सड़क निर्माण की दिशा में ठोस प्रगति नहीं हुई। ग्रामीणों का आरोप है कि लगातार मांग उठाने के बावजूद उनकी समस्या को गंभीरता से नहीं लिया गया।

ग्रामीणों ने पूर्व कैबिनेट मंत्री स्व. चंदन राम दास और वर्तमान जनप्रतिनिधियों पर भी सड़क निर्माण के लिए अपेक्षित सहयोग नहीं करने का आरोप लगाया है। ग्रामीणों का कहना है कि चुनाव के दौरान सड़क निर्माण के वादे किए जाते हैं, लेकिन चुनाव के बाद उनकी समस्या जस की तस रह जाती है।

ग्रामीण बोले- बड़ी अनहोनी हुई तो किसकी होगी जिम्मेदारी?

ग्रामीण संजय चन्याल ने कहा कि बिलेख में हुई घटना केवल एक महिला के घायल होने का मामला नहीं है, बल्कि यह पहाड़ के गांवों की बदहाल स्थिति और मूलभूत सुविधाओं की कमी को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि जब गांव के बच्चे, महिलाएं, बुजुर्ग और अन्य ग्रामीण रोजाना जान जोखिम में डालकर गधेरे को पार करने को मजबूर हैं, तो प्रशासन को किसी बड़े हादसे का इंतजार नहीं करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि यदि जल्द ही सड़क निर्माण की दिशा में ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो ग्रामीण चुनाव बहिष्कार जैसे कड़े कदम उठाने को मजबूर होंगे। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि भविष्य में यदि किसी व्यक्ति की जान इस खतरनाक रास्ते के कारण जाती है तो इसकी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन के साथ संबंधित जनप्रतिनिधियों की भी तय होनी चाहिए।

वहीं बागेश्वर की विधायक पार्वती दास ने कहा कि बिलेख गांव की सड़क के लिए प्रस्ताव तैयार किया जाएगा। ग्रामीणों को उम्मीद है कि इस बार सड़क निर्माण की प्रक्रिया केवल कागजों तक सीमित नहीं रहेगी और जल्द ही धरातल पर काम शुरू होगा।

ग्रामीणों की मांग है कि प्रशासन मौके का निरीक्षण कर गधेरे पर तत्काल सुरक्षित अस्थायी व्यवस्था उपलब्ध कराए और सड़क निर्माण की प्रक्रिया को प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाया जाए, ताकि स्कूली बच्चों और ग्रामीणों को रोजाना जान जोखिम में डालकर आवाजाही न करनी पड़े।

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