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राजस्व अभिलेखों में दर्ज नाले का सीमांकन सार्वजनिक करने की मांग
कालाढूंगी। कालाढूंगी के चकलुवा क्षेत्र में तेजी से चल रही आवासीय प्लॉटिंग को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। ग्रामीणों ने प्लॉटिंग क्षेत्र में राजस्व अभिलेखों में दर्ज नाले के सीमांकन को लेकर गंभीर सवाल उठाते हुए प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।

ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण और प्लॉटिंग से जुड़े लोगों द्वारा नाले को अपनी सुविधा के अनुसार मोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में आवासीय प्लॉटिंग के दौरान राजस्व भूमि और नाले की वास्तविक स्थिति को स्पष्ट किए बिना निर्माण कार्य किए जा रहे हैं। आरोप है कि नाले के स्वरूप और दिशा में बदलाव किया गया है, जिससे भविष्य में बरसात के दौरान जल निकासी की समस्या उत्पन्न होने के साथ-साथ आसपास के क्षेत्रों में जलभराव का खतरा भी बढ़ सकता है।
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया है कि यदि प्रशासन द्वारा राजस्व अभिलेखों और मौके की स्थिति के आधार पर निष्पक्ष सीमांकन कराया जाता है तो प्लॉटिंग क्षेत्र के बड़े हिस्से के राजस्व भूमि में आने की स्थिति सामने आ सकती है। ऐसे में पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और राजस्व रिकॉर्ड के आधार पर वास्तविक स्थिति सार्वजनिक किए जाने की मांग जोर पकड़ रही है।
नाले की दिशा बदलने का आरोप
स्थानीय ग्रामीणों के मुताबिक, क्षेत्र में प्राकृतिक एवं राजस्व नाले का उपयोग लंबे समय से जल निकासी के लिए होता रहा है। आरोप है कि आवासीय प्लॉटिंग के चलते नाले के स्वरूप में बदलाव किया जा रहा है और कुछ स्थानों पर इसे मनमाने ढंग से मोड़ने की कोशिश की गई है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मौके पर राजस्व अधिकारियों की मौजूदगी में नाले की पैमाइश कराने की मांग की है।
पुलिया को लेकर भी जांच के आदेश
मामले को लेकर कालाढूंगी के एसडीएम सुधीर कुमार ने बताया कि नाले पर बनी पुलिया को लेकर जांच के आदेश दिए गए हैं। प्रशासन द्वारा जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि पुलिया और नाले का निर्माण राजस्व अभिलेखों में दर्ज स्थिति के अनुरूप है या नहीं।
ग्रामीणों का कहना है कि केवल पुलिया की जांच पर्याप्त नहीं होगी, बल्कि पूरे प्लॉटिंग क्षेत्र में नाले और राजस्व भूमि का वास्तविक सीमांकन कराया जाना जरूरी है। उनका कहना है कि राजस्व रिकॉर्ड के आधार पर मौके की पैमाइश होने से विवाद की वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है।
सीमांकन सार्वजनिक करने की मांग
ग्रामीणों ने राजस्व अभिलेखों में दर्ज नाले के सीमांकन को सार्वजनिक करने की मांग की है। उनका कहना है कि प्रशासन यदि अभिलेखों के आधार पर नाले की वास्तविक सीमा और दिशा स्पष्ट कर दे तो कई सवालों का जवाब स्वतः मिल जाएगा। साथ ही यदि जांच में सरकारी अथवा राजस्व भूमि पर अतिक्रमण या नाले के स्वरूप में अनधिकृत बदलाव पाया जाता है तो संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
फिलहाल चकलुवा क्षेत्र में आवासीय प्लॉटिंग को लेकर उठे इन सवालों के बीच सभी की नजर प्रशासन की जांच और आगामी कार्रवाई पर टिकी है। अब देखने वाली बात होगी कि प्रशासन नाले के सीमांकन और राजस्व भूमि से जुड़े आरोपों की जांच किस स्तर पर कराता है और जांच के बाद क्या कार्रवाई सामने आती है।

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