देवीधुरा। चम्पावत जिले के प्रसिद्ध मां बाराही धाम देवीधुरा में ऐतिहासिक एवं पौराणिक बगवाल मेले का रविवार को विधिवत शुभारंभ हो गया। कैबिनेट मंत्री राम सिंह कैड़ा ने मेले का उद्घाटन किया।
मेले को लेकर क्षेत्र में उत्साह का माहौल है और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं व पर्यटकों के पहुंचने की उम्मीद है। मेला समिति की ओर से आयोजन को भव्य और व्यवस्थित बनाने के लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।
मेला समिति के अध्यक्ष मोहन सिंह बिष्ट ने बताया कि इस वर्ष मेला 23 अगस्त से चार सितंबर तक आयोजित किया जा रहा है। मेले का सबसे प्रमुख और ऐतिहासिक आयोजन बगवाल 28 अगस्त को खोलीखाड़ी मैदान में पारंपरिक रीति-रिवाजों और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार संपन्न होगा। बगवाल को देखने के लिए उत्तराखंड ही नहीं, बल्कि देश के विभिन्न हिस्सों से श्रद्धालु और पर्यटक देवीधुरा पहुंचते हैं।
28 अगस्त को होगी ऐतिहासिक बगवाल
मां बाराही धाम उत्तराखंड के प्रमुख शक्तिपीठों में शुमार है। यहां सदियों से चली आ रही बगवाल की परंपरा धार्मिक आस्था के साथ-साथ लोक संस्कृति और ऐतिहासिक विरासत का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है। बगवाल के दौरान चार खामों के बगवाली पारंपरिक वेशभूषा में खोलीखाड़ी मैदान में एकत्रित होते हैं और पत्थरों से युद्ध की अनूठी परंपरा का निर्वहन करते हैं।
धार्मिक मान्यता के अनुसार बगवाल मां बाराही को प्रसन्न करने के लिए आयोजित की जाती है। इस दौरान चार खामों के लोग अपनी परंपरा और धार्मिक आस्था के अनुरूप इसमें भाग लेते हैं। बगवाल के आयोजन को देखने के लिए हर वर्ष बड़ी संख्या में लोग देवीधुरा पहुंचते हैं। प्रशासन और मेला समिति की ओर से आयोजन को सुरक्षित एवं व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने की तैयारियां भी की जा रही हैं।
धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों की रहेगी धूम
चार सितंबर तक चलने वाले मेले में धार्मिक अनुष्ठानों के साथ विभिन्न सांस्कृतिक, खेल, बौद्धिक और शैक्षिक प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाएगा। मेले के दौरान स्थानीय लोक संस्कृति और परंपराओं की भी झलक देखने को मिलेगी।
विशेष रूप से स्थानीय महिलाओं द्वारा आंचलिक परिधानों में प्रस्तुत किया जाने वाला झोड़ा गायन मेले के प्रमुख आकर्षणों में शामिल रहेगा। इसके माध्यम से क्षेत्र की समृद्ध लोक संस्कृति और पारंपरिक विरासत को लोगों के सामने प्रस्तुत किया जाएगा।
आकर्षक ढंग से सजाया गया मां बाराही मंदिर
मेले को लेकर मां बाराही मंदिर को आकर्षक ढंग से सजाया गया है। मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की आवाजाही को देखते हुए व्यवस्थाओं को दुरुस्त किया गया है। मेला समिति और स्थानीय स्तर पर आयोजन को सफल बनाने के लिए लगातार तैयारियां की जा रही हैं।
मंदिर समिति और स्थानीय व्यापारियों से धाम की स्वच्छता और सुंदरता बनाए रखने की अपील की गई है, ताकि मेले में आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर वातावरण मिल सके। आयोजकों ने श्रद्धालुओं से भी धार्मिक स्थल की गरिमा बनाए रखने और स्वच्छता व्यवस्था में सहयोग करने का आह्वान किया है।
तैयारियों में जुटे मेला समिति के पदाधिकारी
मेले को सफल बनाने के लिए मेला समिति से जुड़े पदाधिकारी और स्थानीय लोग लगातार तैयारियों में जुटे हैं। पीठाचार्य कीर्ति बल्लभ जोशी, लक्ष्मण सिंह लमगड़िया, हयात सिंह, खीम सिंह लमगड़िया, ईश्वर सिंह, विनोद जोशी, नवीन राणा, लक्ष्मी दत्त जोशी, योगेश, नरेश सिंह, रोशन लमगड़िया, त्रिलोक सिंह, चंदन सिंह और रमेश राणा सहित अन्य लोग व्यवस्थाओं को अंतिम रूप देने में जुटे हुए हैं।
मेले के दौरान धार्मिक आस्था, लोक संस्कृति और पारंपरिक विरासत का अनूठा संगम देखने को मिलेगा। खासकर 28 अगस्त को होने वाली ऐतिहासिक बगवाल पर सभी की निगाहें रहेंगी।









