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नई दिल्ली। विभिन्न परीक्षाओं में होने वाली नकल और ऐसा करने वाले नकल माफियाओं पर रोक लगाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार एक विधेयक लाई है। इस विधेयक का नाम पब्लिक एग्जामिनेशंस (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) बिल है और इसे कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन मंत्रालय ने पेश किया।

इसमें परीक्षा के दौरान की जाने वाली उन गतिविधियों के बारे में उल्लेख किया गया है जो कानून लागू होने के बाद दंडनीय हो जाएंगे। इसके लिए क्या सजा दी जाएगी यह भी इसमें बताया गया है।

विधेयक में कहा गया है कि इसका उद्देश्य पब्लिक एग्जामिनेशन सिस्टम में पारदर्शिता, निष्पक्षता और क्रेडिबिलिटी लाना है। इसका उद्देश्य युवाओं को आश्वासन देना है कि उनके प्रयासों का सही परिणाम मिलेगा और उनका भविष्य सुरक्षित रहेगा।

बिल का एक लक्ष्य नकल कराने वाले ऐसे लोगों, संगठनों और संस्थानों के खिलाफ प्रभावी और वैध कार्रवाई करना भी है, जो पब्लिक एग्जामिनेशन सिस्टम पर गलत असर डालते हैं। इसका असर ईमानदारी से तैयारी करने वाले छात्रों को भुगतना पड़ता है, जो गलत है।

नए कानून के तहत आएंगी यह परीक्षाएं

केंद्रीय लोक सेवा आयोग (यूपीएससी), स्टाफ सेलेक्शन कमीशन (एसएससी), रेलवे रिक्रूटमेंट बोर्ड (आरआरबी), इंस्टीट्यूट ऑफ बैंकिंग पर्सनल सेलेक्शन, केंद्र सरकार के मंत्रालयों या विभागों और उनसे जुड़े कार्यालयों में स्टाफ की भर्ती, नेशनल टेस्टिंग एजेंसी या केंद्र सरकार की ओर से अधिसूचित अन्य अथॉरिटी की ओर से आयोजित कराई जाने वाली परीक्षाओं को केंद्र सरकार की ओर से लाए गए इस नकल विरोधी बिल के तहत रखा गया है। इस बिल के कानून बन जाने के बाद ये परीक्षाएं इसके दायरे में आ जाएंगी।

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