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कुमाऊनी लोक गायक प्रहलाद मेहरा  का हुआ निधन

उत्तराखंड में दौंडी शोक की लहर

उत्तराखंड के लोकगायक प्रहलाद मेहरा दिल का दौरा पढ़ने से निधन हो गया।

उन्होंने हल्द्वानी कृष्णा हॉस्पिटल में ली अंतिम सांस।

 कुमाऊनी लोक गायक प्रहलाद सिंह मेहरा  का  53 वर्ष की आयु में दिल का दौरा पड़ने से हुआ निधन, कृष्णा हल्द्वानी हॉस्पिटल में ली अंतिम सांस

रिपोर्टर – गुड्डू सिंह ठठोला 

हल्द्वानी। कुमाऊनी सिंगर प्रहलाद मेहरा का दिल का दौरा पढ़ने से 53 वर्ष की आयु में हृदय गति रुकने से निधन हो गया।

उनकी मृत्यु ने लोक संगीत प्रेमियों को शोक में डुबो दिया,  प्रहलाद सिंह मेहरा अपनी मधुर आवाज और लोकगीतों के प्रति संपूर्ण के लिए जाने जाते थे।

उनका जन्म 1971 में उत्तराखंड गढ़वाल में हुआ था। उन्होंने कम उम्र में ही लोक गायन सीखना शुरू कर दिया था। जल्दी ही अपनी प्रतिभा से लोगों का दिल जीत लिया था।

 मेहरा ने कई लोकप्रिय लोकगीत गए जिसमें छक छक छीना जलेबी को डाब, ना बॉस कावा काऊ काऊ और ईजा मेरी दनपुरा शामिल है।

 लगभग 35 साल से लोक गायन के क्षेत्र में थे, उनके गए अंकित गिनत हिट गाने उत्तराखंडियो के बीच पूरे विश्व भर में प्रसिद्ध  थे।

पारंपरिक लोक गायन विधाओं को गरिमामय तरीके से नए रुप प्रस्तुत करते थे ।

उनकी लोकप्रियता के मुख्य कारण ये भी है। उन्होंने कई कुमाऊनी गाने खुद लिखे थे।

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