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नैनीताल में तिब्बती संगठन की महिलाओ ने अपने दुकानों को बंद कर चीन द्वारा 11वें पंचेन लामा की रिहाई को लेकर मोमबत्ती जलाकर याद किया

रिपोर्टर गुड्डू सिंह ठठोला

नैनीताल। 11वें पंचेन लामा गेधुन चोएक्यी न्यीमा को छह साल की उम्र में चीनी सरकार द्वारा अपहरण कर लिया था ।

इस हृदय विदारक और महत्वपूर्ण ३०वीं वर्षगांठ को तिब्बती समुदाय ने नैनीताल में भी उनकी रिहाई के लिए सभा आयोजित की साथ ही केंडिल जलाकर 11वे पंचेन लामा की चीनी सरकार से रिहाई की मांग की।

 तिब्बती युवा संगठन के अध्यक्ष टेन्जिँग जिग्मे का कहना है कि पंचेन लामा को 30 साल पहले जब वे छ वर्ष के थे तब उन्हें चीनी सरकार द्वारा जबरन अपहरण कर बंधी बना लिया था।

जिसके बाद से आज तक उनका कोई अता पता नही है और ना ही वे किसी को नज़र आये है जबकि चीनी सरकार का कहना है कि वे जिंदा है और किसी से नही मिलना चाहते है।

तिबाती समुदाय का कहना है अगर वे जिंदा है तो चीनी सरकार पंचेन लामा को रिहा करे। और उन्हें दुनिया के सामने लाए।17 मई 1995 को अपहरण हुआ था तो आज पूरे 30 साल बाद भी उनकी रिहाई के लिए तिब्बत समुदाय ने चीनी सरकार से रिहाई की मांग की है।

बताया कि किसी भी देश को आज तक पता नही है कि पंचेन लामा चीन के किस कोने में कैद है 30 सालो से सभी उनकी रिहाई की कामना करते हुए आ रहे है ।

उन्होंने सभी देश वासियों से उनका सहयोग करने की मांग की ओर चीन से उन्हें जल्द छोड़ने की अपील की।

बता दे कि 11वें पंचेन लामा,गेधुन चोएक्यी न्यीमा को छह साल की उम्र में चीनी सरकार द्वारा अपहरण किए जाने की हृदय विदारक और महत्वपूर्ण ३०वीं वर्षगांठ है।

यह दुखद घटना परम पावन १४वें दलाई लामा, सभी तिब्बती बौद्ध परंपराओं के पूजनीय नेता द्वारा उन्हें उन्हें ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण १०वें पंचेन लामा के अचूक पुनर्जन्म के रूप में मान्यता दिए जाने और घोषित किए जाने के तीन दिन बाद ही घटित हुई, जिन्होंने तिब्बती पहचान के अस्तित्व के लिए अथक प्रयास किए थे।

युवा पंचेन लामा, गेधुन चोएक्यी न्यीमा के साथ-साथ चीनी सरकार ने उनके परिवार के सदस्यों, चाद्रेल रिनपोछे, ताशी ल्हुनपो मठ के प्रमुख और पुनर्जन्म की खोज समिति के नेता जम्पा त्रिनले और जंगपा चुंग को भी अगवा कर लिया।

ये सभी तीस साल से बिना किसी सुराग के गायब हैं। इस दोरान ताशी टॉपिकल सचिव कलसंग चुकी महिला संघ के अध्यक्ष येशि थुपटेंन सिरिंग डोलमा गुरुजी सुलट्रिम एंड लोब्संग आदि महिलाएं और पुरुष मौजूद थे।

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