भीमताल। ‘आरएसएसएस’ कुमाऊँ मंडल अध्यक्ष पूरन चंद्र ब्रजवासी ने उठाया बड़ा कदम उत्तराखंड राज्य के कुमाऊँ मंडल और भीमताल विधानसभा में बेसहारा पशुओं की बढ़ती समस्या को हल करने के लिए राष्ट्रीय शिव शक्ति सेना (आरएसएसएस) के कुमाऊँ मंडल अध्यक्ष पूरन चंद्र ब्रजवासी ने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को पत्र लिखकर गौशाला निर्माण की मांग को तेज किया है।
यह पहल क्षेत्र के किसानों, व्यापारियों, पर्यटकों और यातायात को हो रही परेशानियों को दूर करने के साथ-साथ बेसहारा पशुओं को सुरक्षित आश्रय प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
पूरन चंद्र ने अपने पत्र में बताया कि बेसहारा गायों, बछड़ों और बैलों की बढ़ती संख्या से फसलों को नुकसान, व्यापार में बाधा और सड़कों पर यातायात की समस्या गंभीर हो चुकी है।
वर्ष 2016-17 से गौशाला निर्माण की मांग उठ रही है, लेकिन बार-बार प्रशासनिक निर्देश और भूमि निरीक्षण के बाद भी प्रगति रुकी हुई है। कुमाऊँ मंडल में हजारों आवारा पशु स्थानीय समुदाय के लिए चुनौती बने हुए हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि भीमताल नगर, रामगढ़, धारी, ओखलकांडा, भीमताल ब्लॉक और कुमाऊँ मंडल के प्रत्येक ब्लॉक एवं प्रत्येक नगर में ‘नजूल भूमि’ उपयुक्त जमीन का चयन कर गौशाला निर्माण के लिए त्वरित कार्यवाही की जाए।
यह कदम न केवल पशुओं को सम्मानजनक जीवन और सुरक्षा प्रदान करेगा, बल्कि क्षेत्र की अर्थव्यवस्था, पर्यटन और सामाजिक व्यवस्था को भी मजबूती देगा।पूरन चंद्र ने जोर देकर कहा, “गौशालाओ” का निर्माण हमारी सांस्कृतिक और सामाजिक जिम्मेदारी है। यह क्षेत्र के विकास और पर्यावरण संरक्षण के लिए भी एक सकारात्मक कदम होगा।” उनकी इस पहल ने स्थानीय लोगों में नई उम्मीद जगाई है।
जो लंबे समय से इस समस्या के समाधान की प्रतीक्षा कर रहे हैं।स्थानीय समुदाय और सामाजिक संगठनों ने इस मांग का समर्थन करते हुए इसे क्षेत्र की समृद्धि और पशु कल्याण के लिए एक ऐतिहासिक कदम बताया है।
कुमाऊँ मंडल ‘आरएएसएस’ अध्यक्ष पूरन चंद्र बृजवासी ने विश्वास जताया कि मुख्यमंत्री की संवेदनशीलता और सक्रिय नेतृत्व से यह मांग जल्द पूरी होगी।
मांग करने वालों में कुमाऊँ मंडल उपाध्यक्ष मुकुल नौटियाल, मंडल महामंत्री जग मोहन उप्रेती, मंडल संगठन मंत्री विनोद कुमार पंत, अधिवक्ता प्रकोष्ठ मंडल अध्यक्ष पुनीत कुमार शर्मा, नगर अध्यक्ष धर्माचार्य प्रकोष्ठ हरीश चंद्र भगत आदि है।





