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हल्द्वानी में 10 वर्षीय अमित की हत्या के 5 दिन बाद मिला लापता सर और हाथ, आरोपी पड़ोसी को पुलिस ने किया गिरफ्तार

रिपोर्टर गुड्डू सिंह ठठोला

हल्द्वानी। 10 वर्षीय मासूम की हत्या के 5 दिन बाद लापता सिर और हाथ मिलने के साथ आरोपी पड़ोसी को पुलिस ने गिरफ्तार किया।
नैनीताल जिले के काठगोदाम थाने में 4 अगस्त को गौलापार निवासी ख़ूबकरन मौर्य ने अपने 10 वर्षीय बेटे अमित की गुमशुदगी लिखाई। बीती 5 अगस्त को पुलिस ने मृतक का सिर और हाथ कटा धड़ पड़ोसी के घर के गोठ से बरामद किया।

भारी जन दबाव के बीच पुलिस टीम ने मनोचिकित्सक की मदद से आज अंगों के साथ तंत्र विद्या का ढोंग कर रहे पड़ोसी को गिरफ्तार किया। पुलिस ने आसपास के लोगों से पूछताछ की और सीसीटीवी खंगाले। सफलता नहीं मिलने पर एस.एस.पी.प्रह्लाद नारायण मीना ने तीन सर्च टीमें बनाई।

पांच अगस्त को लापता अमित का शव अभियुक्त मोहन चन्द्र जोशी के बाड़े में एक प्लास्टिक के कट्टे के अंदर दबा हुआ मिला। लेकिन, शव का सिर और दाहिना हाथ धड़ से कटा हुआ था।

अब पुलिस कप्तान ने एस.पी.सिटी हल्द्वानी प्रकाश चंद, एस.पी. क्राइम डॉ.जगदीश चंद्रा, क्षेत्राधिकारी हल्द्वानी नितिन लोहनी, क्षेत्राधिकारी भवाली प्रमोद शाह, क्षेत्राधिकारी रामनगर सुमित पांडे की सर्च टीम बनाई। खोज के लिए डॉग स्क्वॉड, ड्रोन कैमरा और एफ.एस.एल.टीम की सहायता लेने के साथ संदिग्ध व्यक्तियों से पूछताछ की गई।
शातिर किस्म के अभियुक्त तांत्रिक क्रियाओं की ओर घटनाक्रम को मोड़कर पुलिस टीम को लगातार गुमराह करने का प्रयास करता रहा। पुलिस के अनुसार, आरोपी की मानसिक स्थिति में जटिलता एवं बार-बार गुमराह करने की प्रवृत्ति को देखते हुए, मामले में गहराई से पड़ताल के लिए मनोचिकित्सक डॉ.युवराज पंत की विशेषज्ञ सहायता ली गई।
आज जब 38 वर्षीय संदिग्ध निखिल जोशी से गहन पूछताछ की गई तो अभियुक्त ने कबूल किया कि उसने बालक की हत्या कर शव को बाड़े में गड्डे के अंदर दबाया और सिर और दाहिना हाथ गोठ में कबाड़ के नीचे गाड़ दिया।

पुलिस ने अभियुक्त की निशानदेही पर उसी गोठ से बालक की चप्पल, सिर और कटा हुआ दाहिना हाथ बरामद किया। अभियुक्त निखिल जोशी को गिरफ्तार कर न्यायालय के समक्ष पेश किया जा रहा है।
पुलिस को अभियुक्त ने बताया कि वह बच्चे को घिनौनी मंशा से अपने साथ लाया था। बच्चे के विरोध करने पर उसने बेरहमी से गला दबाकर हत्या कर दी।

वारदात को छुपाने के लिए मृतक का सिर और हाथ काट डाले। समय की कमी के चलते, शव को अपने ही घर में जल्दबाज़ी में दफना दिया। आई.जी.ने वर्कआउट करने वाली टीम को ₹5,000/= और एस.एस.पी.ने ₹2,500/= का पुरुष्कार दिया।

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