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हल्द्वानी। राज्य का पहला सरकारी मेडिकल कालेज और इससे जुड़ा कुमाऊं का सबसे बड़ा डा. सुशीला तिवारी अस्पताल। जहां उपनल के जरिये कर्मचारियों की भर्ती की गई थी। इस समय यह संख्या 659 है।

इसमें गार्ड से लेकर सफाई कर्मचारी, फार्मासिस्ट व तकनीशियन तक शामिल हैं।

शासन ने इन्हें पिछले 18 वर्षों तक नियमित वेतन दिया, लेकिन अब अचानक झटका दे दिया। अब ये कर्मचारी पांच महीने से वेतन को तरस गए हैं।

जनप्रतिनिधियों के दर पर गुहार लगाते हुए थक चुके हैं। सत्तापक्ष के जनप्रतिनिधियों का दावा है कि समाधान निकाला जा रहा है और विपक्षी दल के विधायक ने विधानसभा में इस मुद्दे को उठाने का वादा किया है।

भले इन कर्मचारियों की नियुक्ति निर्धारित पद के सापेक्ष नहीं हुई थी लेकिन पिछले 18 वर्षों में इनकी नियुक्ति होती रही।

अस्पताल में मरीजों की संख्या भी बढ़ती गई और इनकी जरूरत भी महसूस की गई। कोरोना के समय भी इन कर्मचारियों ने कड़ी मेनहत की।

क्योंकि कोरोनाकाल में पूरे कुमाऊं से रेफर होकर मरीज इसी अस्पताल में भर्ती होते थे। अब ये पांच महीने से वेतन न मिलने की वजह से निराश हैं।

यहां तक कि 12 से 18 हजार रुपये मासिक वेतन की नौकरी पर भी खतरा मंडराता हुआ दिख रहा है। क्योंकि इनके मामले में निर्णय लेने में राजनीतिक व प्रशासनिक इच्छाशक्ति भी नहीं दिख रही है।

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