प्रयागराज में भाजपा नेता और पूर्व जिला पंचायत सदस्य रणधीर यादव को अगवा कर हत्या करने वाले उदय यादव ने पुलिस को चकमा देकर कोर्ट में सरेंडर कर दिया है। वकीलों की तरह काली पैंट और सफेद शर्ट में उदय कोर्ट पहुंचा था।
रणधीर के साथ पत्नी अंजली और बेटे को लेकर उदय जुलाई में नैनीताल घूमने गया था। इसी दौरान अंजली को रणधीर के साथ आपत्तिजनक हालत में देखकर आग बबूला हो गया था। कुछ दिन बाद अंजली की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। 22 अगस्त को रणधीर को भी उदय ने मौत के घाट उतार दिया था। रणधीर की लाश रेलवे ट्रैक पर फेंका था।
कई टुकड़े होने से पहचान भी नहीं हो सकी थी। रणधीर की पत्नी ने उदय के खिलाफ तहरीर दी तो एक के बाद एक कड़ियां जुड़ती गईं और पुलिस ने 28 अगस्त को मामले का खुलासा किया था। उदय का साथ देने वाले करीब आठ लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। उदय की तलाश हो रही थी।
पूर्व जिला पंचायत सदस्य रणधीर यादव 22 अगस्त को अचानक लापता हो गए थे। उनकी पत्नी जिला पंचायत सदस्य बबली यादव ने अपहरण की आशंका जताते हुए पति के ही दोस्त उदय यादव के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस की जांच में पता चला कि रणधीर और उदय में अच्छी दोस्ती थी। रणधीर का सोशल मीडिया अकाउंट भी उदय ही देखता था।
लगभग दो महीने पहले रणधीर यादव को लेकर उदय यादव, अपनी पत्नी अंजलि यादव और आठ साल के बेटे के साथ नैनीताल घूमने गया था। अंजलि के कहने पर होटल के एक ही कमरे में चारों ठहरे थे।
रणधीर यादव ने उदय को खाना लाने को भेजा था, जबकि अंजलि ने अपने बेटे को बाहर खेलने को छोड़ दिया। उदय जब लौटा तो रणधीर और अंजलि को आपत्तिजनक स्थिति में देखकर सन्न रह गया। उस दौरान विवाद भी हुआ।
नैनीताल से लौटते ही रची साजिश
वहां से लौटने के बाद उसने अपनी पत्नी को उसके मायके छोड़ दिया। इसी बीच 11 जुलाई को अंजलि की मायके में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। परिजनों ने बिना पुलिस को सूचना दिए ही शव का दाह संस्कार भी कर दिया था। पुलिस का माना है कि उदय ही पत्नी की मौत भी हत्या हो सकती है। इसके बाद उदय ने रणधीर यादव की हत्या की साजिश रची। साजिश में उसने अपने भाई विजय यादव, भतीजे राम सिंह यादव, नौकर सुजीत श्रीवास्तव और सास लीला देवी को भी मिलाया।
गला दबाकर हत्या, शव ट्रैक पर फेंका
साजिश के तहत 22 अगस्त को राम सिंह यादव अपने साथ रणधीर यादव को हथिगहां के रवि ढाबा ले गया। जहां दोनों ने जमकर शराब पी। इसके बाद फाफामऊ के मलाक हरहर गए।
जहां स्कार्पियो में उदय यादव, विजय यादव व सुजीत श्रीवास्तव भी सवार हो गए। इसके बाद रणधीर का गला दबाकर मौत के घाट उतार दिया। शव को ठिकाने लगाने की नीयत से रेलवे ट्रैक पर फेंक कर सभी फरार हो गए।
पुलिस को उसी रात बमरौली स्टेशन के आउटर के पास सूबेदारगंज की तरफ जाने वाली रेल पटरी पर टुकड़ों में शव तो मिला लेकिन पहचान नहीं हो सकी। स्टेशन मास्टर की सूचना पर पूरामुफ्ती थाने की पुलिस ने शव को 72 घंटे बाद भी शिनाख्त नहीं होने से लावारिस में दाह संस्कार करा दिया था।
मामले का खुलासा होने पर रणधीर यादव के पिता राम अभिलाष यादव ने कपड़े व फोटो के आधार पर शिनाख्त की। इसके बाद गिरफ्तारी शुरू हुईं। उदय तभी से फरार था।
