महाराष्ट्र की राजनीति में ऐतिहासिक दिन; बीएमसी में पहली बार महिला मेयर!
आरक्षण लॉटरी ने पलटी मुंबई की सियासत, बीजेपी को सीधा फायदा
मेयर आरक्षण लॉटरी ने बदले सियासी समीकरण
महाराष्ट्र की राजनीति में आज का दिन ऐतिहासिक बन गया, जब मंत्रालय में कांच के जार से पर्चियां निकलनी शुरू हुईं। 29 महानगरपालिकाओं के मेयर पदों के लिए आरक्षण की लॉटरी घोषित होते ही कई दिग्गज नेताओं की धड़कनें तेज हो गईं।
सबसे बड़ा झटका देश की सबसे अमीर महानगरपालिका मुंबई (BMC) को लेकर सामने आया, जहां अब महिला मेयर का रास्ता साफ हो गया है।
मुंबई में ‘महिला राज’
बीएमसी मेयर पद सामान्य महिला के लिए आरक्षित
लॉटरी के अनुसार इस बार मुंबई महानगरपालिका का मेयर पद सामान्य श्रेणी की महिला (General Female) के लिए आरक्षित किया गया है।
इस फैसले के बाद यह लगभग तय माना जा रहा है कि मुंबई की सत्ता अब किसी महिला पार्षद के हाथों में होगी।
हालिया चुनाव परिणामों में
बीजेपी: 89 सीटें
एकनाथ शिंदे की शिवसेना: 29 सीटें
महायुति के पास कुल 118 पार्षद, यानी स्पष्ट बहुमत
➡️ ऐसे में अगला मेयर बीजेपी–शिंदे गठबंधन से होना लगभग तय है।
बीजेपी अब अपनी किसी कद्दावर महिला नेता को बीएमसी की कुर्सी पर बैठाने की रणनीति बना रही है।
उद्धव ठाकरे को बड़ा झटका
आरक्षण लॉटरी प्रक्रिया का बहिष्कार
25 वर्षों तक बीएमसी पर राज करने वाले उद्धव ठाकरे के लिए यह फैसला किसी सदमे से कम नहीं रहा।
उद्धव गुट को उम्मीद थी कि
मेयर पद OBC वर्ग के लिए आरक्षित होगा
लेकिन जैसे ही
‘सामान्य महिला’ की पर्ची निकली
शिवसेना (UBT) ने कड़ा विरोध दर्ज कराया
पार्टी का आरोप है कि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी नहीं है।
नाराजगी इतनी बढ़ गई कि उद्धव ठाकरे की पार्टी ने पूरी आरक्षण लॉटरी प्रक्रिया का बहिष्कार कर दिया।
ओबीसी वर्ग को मिला बड़ा प्रतिनिधित्व
29 में से 8 मेयर पद OBC के लिए आरक्षित
इस लॉटरी में ओबीसी वर्ग को भी खास तवज्जो दी गई:
🔹 OBC महिला मेयर:
जलगांव
चंद्रपुर
अहिल्यानगर
अकोला
🔹 OBC पुरुष मेयर:
उल्हासनगर
कोल्हापुर
पनवेल
इचलकरंजी
➡️ इस फैसले से कई स्थानीय नेताओं के सियासी समीकरण बिगड़ गए हैं और नए चेहरों की तलाश शुरू हो गई है।
पुणे और नासिक में ‘ओपन फाइट’
सामान्य श्रेणी में रखा गया मेयर पद
इन बड़े शहरों में मेयर पद सामान्य श्रेणी में रखा गया है:
पुणे
पिंपरी-चिंचवाड़
नासिक
सोलापुर
सांगली
पुणे और पिंपरी-चिंचवाड़ में बीजेपी सत्ता में होने के कारण पार्टी के भीतर ही मेयर पद को लेकर भीतरी खींचतान तेज हो गई है।
अन्य शहरों में आरक्षण से बदलेगा सियासी खेल
ठाणे: अनुसूचित जाति (SC) के लिए आरक्षित
कल्याण-डोंबिवली: अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए आरक्षित
➡️ इन शहरों में स्थानीय राजनीति में बड़े उलटफेर के संकेत मिल रहे हैं।
आगे की सियासत
विपक्ष में बैठकर कैसे लड़ेगा ठाकरे–राज गठबंधन?
अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि
उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे का गठबंधन, जिसके पास कुल 71 पार्षद हैं,
वह विपक्ष में बैठकर महायुति की संभावित महिला मेयर का सामना किस रणनीति से करता है।














