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नैनीताल में दीपावली का त्यौहार धूमधाम से मनाया गया 

रिपोर्टर- गुड्डू सिंह ठठोला

नैनीताल। राज्य व देशभर पिछले गई दिनों से घरों को सजाने-संवारने का सिलसिला जारी था। तैयारियां जोरशोर से चल रही थीं। इस बीच मूर्ति निर्माण का कार्य भी शुरू हो गया। जिसे जिले भसर में धूम धाम से मनेस जाता है।

कुमाऊं में भी दीपावली पर्व का अपन्स अलग ही महत्व है जिसे कुमाऊनी व गढ़वाली परंपराओ के आधार पर धूमधाम से मनाया जाता है।

यहां दीपावली पर घर-घर में गन्ने से लक्ष्मी की मूर्ति बनाने का रिवाज है। सदियों पुराने इस रिवाज को अब नई पीढ़ी भी निभा रही है। दूसरे जिलों से बस चुके लोग भी इन रीति रिवाजों को निभा रहे है।

सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य रेखा त्रिवेदी ने बताया कि सदियों से नैनीताल में माता लक्ष्मी की मूर्ति बनाने का रिवाज है। मूर्ति बनाने के लिए गन्ने के सबसे निचले भाग को काटकर, उसमें मुखौटा लगाकर लक्ष्मी का रूप दिया जाता है।

गन्ने का निचला हिस्सा सबसे अधिक मिठास देता है और सबको जोड़े रखता है। यह एक सामाजिक समरसता का संदेश है।

दीपावली के अगले दिन पड़ोसी व परिचित एक दूसरे के घर में बनी लक्ष्मी देखने जरूर जाते हैं। त्रिवेदी बताती हैं कि यह रिवाज सदियों पुराना है।

पहले नीबू की मूर्ति बनाई जाती है, बाद में बाजार में मुखौटे आ गए तो उसी से बनाने लगे। घर घर लक्ष्मी बनाने का रिवाज होने की वजह से गन्ने की बिक्री खूब होती है।

पूर्व प्रधानाचार्य के अनुसार पहले कुबेर की पूजा भी होती थी। समुद्र मंथन में माता लक्ष्मी कलश लेकर निकली थी और मानव कल्याण के साथ ही धन दौलत, वैभव को देने वाली होने की वजह से माता लक्ष्मी की पूजा होने लगी।

लोगों ने राक्षस कुल का होने की वजह से कुबेर के बजाय लक्ष्मी पूजा शुरू की थी।

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