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कतर से आठ पूर्व नौसेनिकों की रिहाई की कमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद संभाल रखी थी। उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल को छह बार गुपचुप कतर भेजा। सूत्रों ने बताया कि पीएम की सलाह व विदेश मंत्रालय और विभिन्न भारतीय खुफिया एजेंसियों के संयुक्त प्रयास से यह रिहाई हो सकी।

एजेंसियां पिछले एक साल से लगातार काम कर रही थीं। अजीत डोभाल ने कतर सरकार और वहां के अमीर शेख तमीम बिन हमद अल थानी के नजदीकी लोगों को मौजूद भू-राजनीति के मद्देनजर मामले की बारिकियां समझाईं। उधर, विदेश मंत्री एस जयशंकर की अगुवाई में खास गठित टीम कूटनीतिक स्तर पर मामले को संभाल रही थी।

सूत्रों के मुताबिक इसके तहत सऊदी अरब समेत खाड़ी के कई देशों के साथ भी बातचीत चल रही थी। विदेश में काम करने वाली खुफिया एजेंसी की भूमिका भी काफी अहम मानी जा रही है।

गौरतलब है कि कतर सरकार ने इन आठों पूर्व नौसैनिकों पर जासूसी के लगे आरोप के बारे में कोई जानकारी साझा नहीं की थी। लेकिन एनएसए की कोशिशों के बाद शीर्ष स्तर पर यह जानकारी दी गई। इन्हीं जानकारियों के आधार पर भारतीय एजेंसियों ने अपना बचाव तैयार किया।

23 दिसंबर को मौत की सजा कैद में बदली
पिछले साल 23 दिसंबर को कतर की अदालत ने इनके खिलाफ मौत की सजा को कैद में बदला। पीएम मोदी व भारतीय एजेंसियों की अथक कोशिशों के बाद अमीर ने खुद इसमें ईदिलचस्पी लेनी शुरू कर दी थी।

जब इनकी मौत की सजा को कैद में तब्दील की गई थी तो कमांडर पूर्णेंदु तिवारी को 25 साल, सेलर रागेश को तीन साल, चार आधिकारियों को 15 साल और दो को 10 साल कतर की जेल में बिताने थे।

मोदी के बिना नहीं था मुमकिन
स्वदेश लौटने का सुकून और कैद से आजाद होनी की खुशी चेहरे पर लिए पूर्व नौसैनिकों ने कहा, मोदी के बिना घर वापस मुमकिन नहीं थी। आठ में से स्वदेश लौटे सात नौसैनिकों ने इसके लिए पीएम मोदी का आभार जताया। वहीं अपनों की वापसी पर खुशी से उनके परिवारों के आंसू छलक आए।

परिवारों ने मोदी को ढेरों शुभकामनाएं व आशीष दिए। देश की धरती पर उतरने के बाद एक पूर्व नौसैनिक ने कहा, आज हमारे घर लौटने का पूरा श्रेय पीएम को जाता है। उनके निजी तौर पर हस्तक्षेप से ही यह मुमकिन हुआ।

हमें आजादी दिलाने के लिए उच्चतम स्तर पर हस्तक्षेप किया गया इसके लिए आभार। एक अन्य पूर्व नौसैनिक ने कहा, मैं मोदी के साथ ही कतर के अमीर शेख तमीम बिन हमद अल थानी का भी शुक्रिया करते हैं।

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