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प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), देहरादून ने धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के प्रावधानों के तहत बृज बिहारी शर्मा और अन्य के मामले में 1.75 करोड़ रुपये (लगभग) की अचल संपत्ति को अनंतिम रूप से कुर्क किया है।
ईडी ने सतर्कता प्रतिष्ठान, देहरादून, उत्तराखंड द्वारा आईपीसी, 1860, वन संरक्षण अधिनियम, 1980, वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज एफआईआर के आधार पर जांच शुरू की थी। वन विभाग के अफसरों ने ठेकेदार से मिलकर कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान में अवैध निर्माण कर दिया। पत्नी व बेटों के नाम पर संपत्ति खरीदी।

ईडी की जांच से पता चला कि मुख्य आरोपी किशनचंद, तत्कालीन प्रभागीय वन अधिकारी, कालागढ़ टाइगर रिजर्व फॉरेस्ट, देहरादून ने पाखरो रेंज के तत्कालीन वन रेंजर बृज बिहारी शर्मा और अन्य अधिकारियों/कर्मचारियों/ठेकेदार के साथ मिलीभगत करके सक्षम प्राधिकारी से पूर्वानुमति लिए बिना कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान में कई अवैध संरचनाओं का निर्माण किया था।

प्रवर्तन निदेशालय की जाँच में सामने आया है कि इससे सरकारी खजाने को राजस्व की हानि पहुंची थी।

ईडी के अनुसार, इस मामले में अपराध की आय का उपयोग राजलक्ष्मी शर्मा पत्नी बृज बिहारी शर्मा और अभिषेक कुमार सिंह एवं युगेंद्र कुमार सिंह, जो किशनचंद, तत्कालीन डीएफओ के बेटे थे, के नाम पर अचल संपत्तियाँ अर्जित करने के लिए किया गया था।

लगभग 1.75 करोड़ रुपये मूल्य की इन अचल संपत्तियों को कुर्क करने के लिए एक अनंतिम कुर्की आदेश (पीएओ) जारी किया गया है, जिसमें हरिद्वार, उत्तराखंड और बिजनौर, उत्तर प्रदेश में स्थित भूखंड शामिल हैं।

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