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पर्वतीय क्षेत्रों से पलायन रोकने और युवाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू की गई मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना 2.0 को अपेक्षित सफलता नहीं मिल पा रही है। योजना की अच्छी शुरुआत के बावजूद बैंकों की जटिल प्रक्रियाएं बेरोजगार युवाओं के लिए बड़ी चुनौती बनकर सामने आई हैं।

वर्तमान वर्ष में इस योजना के तहत 10,826 युवाओं ने आवेदन किया, लेकिन इनमें से केवल 5077 युवाओं को ही बैंक ऋण और सब्सिडी का लाभ मिल सका है। 1546 आवेदन बैंकों द्वारा निरस्त कर दिए गए, जबकि 4572 आवेदन अब भी विभिन्न बैंकों में लंबित हैं। इस तरह योजना की सफलता दर करीब 52 प्रतिशत ही रह गई है।

बैंकिंग औपचारिकताएं बनी रुकावट

योजना के तहत ऋण प्राप्त करने के लिए युवाओं को कई जटिल शर्तों से गुजरना पड़ रहा है। इनमें दो गारंटर, सक्रिय बैंक खाता, छह माह की स्टेटमेंट, केवाईसी अपडेट, विस्तृत प्रोजेक्ट रिपोर्ट, संपत्ति से जुड़े दस्तावेज, क्रेडिट स्कोर, और पूर्व ऋण का बकाया न होना जैसी शर्तें शामिल हैं। इसके अलावा बैंक द्वारा भौतिक सत्यापन, आधार-पैन, निवास और शैक्षिक प्रमाण पत्र भी अनिवार्य किए गए हैं। इन सभी प्रक्रियाओं के कारण कई युवा बीच में ही अटक जा रहे हैं।

विभिन्न क्षेत्रों में मिल रहा ऋण

योजना के अंतर्गत विनिर्माण, कृषि आधारित उद्योग, रिपेयरिंग सेवाएं, रेस्टोरेंट, ब्यूटी पार्लर, किराना, बेकरी, टिफिन सेवा, छोटे वाहन, हैंडीक्राफ्ट और अन्य सूक्ष्म व्यवसायों के लिए ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है। लाभार्थियों को 15 से 30 प्रतिशत तक सब्सिडी भी दी जा रही है, जो सीधे उनके बैंक खातों में जमा होती है।

स्टार्टअप की ओर बढ़ते युवा

पुष्कर सिंह धामी की इस पहल के तहत खासकर कोरोना काल के बाद पर्वतीय क्षेत्रों में युवाओं ने स्वरोजगार की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। अब तक 100 से अधिक स्टार्टअप शुरू हो चुके हैं, जो स्थानीय संसाधनों पर आधारित उत्पाद तैयार कर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचा रहे हैं।

हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बैंकिंग प्रक्रियाओं को सरल बनाया जाए तो योजना का लाभ अधिक से अधिक युवाओं तक पहुंच सकता है और पलायन रोकने में यह और प्रभावी साबित हो सकती है।

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