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इस बार गर्मी के सीजन में उत्तराखंड के जंगल भीषण आग की विभीषिका झेल चुके है, लेकिन सरकार है आग बुझाने की उपकरणों का इंतजाम तो कर नहीं पाती, सारा ठीकरा  कर्मचारियों पर फोड़ देती है, कुछ कर्मचारियों को बर्खास्त कर  जनता का गुस्सा शांत करने की कोशिश करती है।

सरकार अपनी नाकाम या छुपाने का पूरा प्रयास करती हैं, हकीकत तो यह है कि हम चांद पर पहुंच कर बड़े-बड़ेकीर्तिमान स्थापित तो कर रहे है।

लेकिन जमीनी स्तर पर हकीकत कुछ और ही बयां करती है कि हम अभी भी कई अभियानों में अन्य देशों से कितने दशकों पीछे हैं आखिर इन सब का कौन है जिम्मेदार 

क्या आग बुझाने के लिए पेड़ की टहनियों को तोड़कर आग कब तक बुझाई जाएगी, आखिर यह सब कब तक चलता रहेगा,

आखिर जिन इंसानों की जान गई है इन वनाग्नि में, इन सब से कब सबक सीखेंगे हम

उत्तराखंड के जंगलों में इस बार गर्मियों में जबरदस्त आग लगी। धधकते जंगल कई सुलगते हुए सवाल छोड़ गए हैं। जिस तरह से आग लगी और हड़बड़ी में वन विभाग और प्रशासन में जो कदम उठाए, वह नाकामी साबित करते हैं।

इस बार पहाड़ी और मैदानी क्षेत्रों मे जबरदस्त गर्मी हो रही है और मानसून से पूर्व होने वाली बारिश भी नहीं हुई है। इससे जंगलों में सूखे पड़े, घास और पत्ते जंगलों के दुश्मन बने हुए हैं जिनमें आग लगते देर नहीं लगती और यह एकदम पूरे जंगल में फैल जाती है।

उत्तराखंड के वन विभाग की हालत यह है कि वह जंगलों में लगी आज को बुझाने के इंतजाम करने की बजाय बारिश पर निर्भर रहता है। इसका नतीजा हुआ कि इस बार सबसे ज्यादा जंगल जले।

इस गर्मी में अब तक आग लगने की सर्वाधिक 242 घटनाएं हो चुकी है और 10 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं जिनमें चार वन कर्मी भी शामिल हैं। इस बार आग लगने से 696.32 हेक्टेयर जंगल बुरी तरह से प्रभावित हुआ है। चार महीने में अब तक गढ़वाल मंडल में 532 ,कुमाऊं में मंडल 598 और आरक्षित वन क्षेत्र में 112 आग लगने की घटनाएं हो चुकी हैं।

अब तक गढ़वाल मंडल में एक तथा कुमाऊं मंडल में नौ लोगों की जंगल में आग लगने से मौत हो चुकी है। वर्ष 2022 में 2171 आग लगने की घटनाएं हुई थीं और 3416.2 हेक्टेयर प्रभावित हुआ था। वर्ष 2023 में 718 घटनाएं हुई थीं और तब 862.41 हेक्टेयर वन क्षेत्र प्रभावित हुआ था।

उत्तराखंडमें वनों में आज की घटनाओं को कैसे रोका जाए  इन मंत्री जी से सीखिए  कि आग की घटनाओं को  पेड़ की टहनी तोड़कर उसे कैसे आग बुझाई जाती है

जब आग बुझाने पहुंचे मंत्री

यमुनोत्री जिले के प्रभारी मंत्री प्रेमचंद्र अग्रवाल का एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें वह आग को बुझाने की कोशिश करते दिखाई दे रहे हैं लेकिन उनकी इस कोशिश को देखकर सोशल मीडिया पर लोग बिफर गए हैं। मिली जानकारी के अनुसार, मंत्री यमुनोत्री मार्ग पर यात्रियों के लिए किए गए इंतजामों का जायजा लेने के बाद पूजा अर्चना की। इसके बाद वह आग बुझाने के लिए पहुंच गए।

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सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में देखा जा सकता है कि मंत्री एक टहनी से आग बुझाने की कोशिश कर रहे हैं। एक अन्य वीडियो में वह सड़क के किनारे पड़ी सूखी घास को हटा रहे हैं लेकिन उनके इस वीडियो को लेकर सोशल मीडिया पर लोगों ने उन्हें ट्रोल किया है। वहीं दूसरी तरफ समर्थकों का कहना है कि वह आग बुझाने इसलिए पहुंचे थे कि उन्हें देखकर ग्रामीण भी आगे आएं आग बुझाने में मदद करें।

इस साल उत्तराखंड के कुमाऊं मंडल के अल्मोड़ा में जंगलों में लगी आग की विभीषिका ने पूरे राज्य को हिला कर रख दिया और इससे पूरे उत्तराखंड में मातम सा छा गया।अल्मोड़ा के बिनसर अभयारण्य के जंगलों में लगी भीषण आग की चपेट में आकर चार वन कर्मिकों की मौत हो गई।

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