भीमताल/ओखलकाण्डा। राष्ट्र निर्माण, सेवा, संस्कार और समर्पण की अखंड परंपरा को आगे बढ़ाते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अपने स्थापना के शताब्दी वर्ष में प्रवेश कर रहा है।
यह ऐतिहासिक अवसर केवल एक संगठन का उत्सव नहीं, बल्कि उन अनगिनत स्वयंसेवकों के तप, त्याग और राष्ट्रभक्ति का प्रतीक है जिन्होंने समाज और राष्ट्र को सर्वोपरि मानकर अपना जीवन समर्पित किया।
शताब्दी वर्ष के इस विशेष अवसर पर आयोजित समारोह में क्षेत्र के बंधुओं एवं मातृशक्ति से सपरिवार, स्नेहीजनों एवं मित्रों सहित सहभागिता का आह्वान किया गया है।
आयोजकों का कहना है कि एक शताब्दी की यह यात्रा हमें उन मूल्यों की याद दिलाती है जो समाज को एक सूत्र में बांधते हैं — राष्ट्र प्रथम, समाज सर्वोपरि और सेवा ही साधना।
संयोजक, हिंदू सम्मेलन मंडल डालकन्या, खण्ड ओखलकाण्डा ने कहा कि यह कार्यक्रम राष्ट्रभावना के महोत्सव के रूप में आयोजित किया जा रहा है, जहां सभी नागरिक मिलकर भारत के उज्ज्वल भविष्य के संकल्प को और सुदृढ़ करेंगे।
उन्होंने अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर इस ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बनने का आग्रह किया है।














