बुजुर्ग की फर्राटेदार अंग्रेजी बनी चर्चा, आयुष्मान योजना पर उठाए गंभीर सवाल
बागेश्वर में कुमाऊं कमिश्नर दीपक रावत के दौरे के दौरान का एक वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
एक बुजुर्ग व्यक्ति अधिकारियों के सामने आयुष्मान योजना के तहत इलाज न मिलने की शिकायत करते नजर आ रहे हैं। खास बात यह रही कि उन्होंने अपनी पूरी बात धाराप्रवाह अंग्रेजी में रखी, जिसने लोगों का ध्यान खींच लिया।
दरअसल, बुजुर्ग अपनी पत्नी के इलाज के लिए हल्द्वानी के निजी अस्पतालों में पहुंचे थे, लेकिन वहां आयुष्मान योजना के तहत इलाज करने से मना कर दिया गया। मजबूरी में उन्होंने अपनी पत्नी का इलाज सुशीला तिवारी अस्पताल में कराया और फिर वापस बागेश्वर लौट आए।
कमिश्नर के निरीक्षण के दौरान बुजुर्ग ने अपनी आपबीती बताते हुए कहा कि उन्होंने कई अस्पतालों के चक्कर लगाए, लेकिन हर जगह उन्हें आयुष्मान कार्ड स्वीकार न होने की बात कही गई।
उन्होंने यह भी बताया कि इस समस्या को लेकर उन्होंने जिला प्रशासन से लेकर मुख्यमंत्री कार्यालय तक संपर्क किया, लेकिन कोई समाधान नहीं मिला।
बुजुर्ग ने बताया कि वह मुंबई में गोदरेज ग्रुप में प्रोफेशनल इंजीनियर रह चुके हैं। उनकी पत्नी को पथरी की गंभीर समस्या थी, जिसके इलाज के लिए उन्हें तुरंत अस्पताल की जरूरत थी। लेकिन आयुष्मान योजना का लाभ न मिलने के कारण उन्हें निजी अस्पताल में अपनी जेब से खर्च कर इलाज कराना पड़ा।
गौरतलब है कि उत्तराखंड में अटल आयुष्मान योजना के तहत सूचीबद्ध बीमारियों का इलाज निजी अस्पतालों में भी निशुल्क किया जाना चाहिए, जिसमें पांच लाख रुपये तक की चिकित्सा सुविधा शामिल है। इसके बावजूद जमीनी स्तर पर योजना के क्रियान्वयन को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
मामले को गंभीरता से लेते हुए कमिश्नर दीपक रावत ने बुजुर्ग से लिखित शिकायत मांगी है और संबंधित अस्पतालों की सूची भी उपलब्ध कराने को कहा है। उन्होंने आश्वासन दिया कि दोषी पाए जाने पर अस्पतालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
यह वायरल वीडियो भले ही बुजुर्ग की अंग्रेजी के कारण चर्चा में हो, लेकिन असली मुद्दा स्वास्थ्य सेवाओं की जमीनी हकीकत है। पहाड़ी क्षेत्रों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी, सीमित संसाधन और निजी अस्पतालों में सरकारी योजनाओं का सही पालन न होना अब एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।

