उत्तराखंड का बजट सत्र 9 मार्च से 13 मार्च तक गैरसैंण में आयोजित होगा। सत्र की तैयारियां शुरू हो गई हैं। 9 मार्च को राज्यपाल के अभिभाषण के साथ कार्यवाही की शुरुआत होगी, जबकि 11 मार्च को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सदन में राज्य का बजट पेश करेंगे।
सत्र की घोषणा होते ही प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने विधानसभा सत्र की अवधि और कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि 9 मार्च (सोमवार) को राज्यपाल का अभिभाषण प्रस्तावित है, जबकि परंपरागत रूप से सोमवार का दिन मुख्यमंत्री के प्रश्नकाल के लिए माना जाता रहा है।
गोदियाल ने कहा कि मुख्यमंत्री के पास गृह, वित्त, राजस्व, ऊर्जा, शहरी विकास, आपदा प्रबंधन, पर्यावरण, परिवहन, उद्योग, श्रम, सूचना प्रौद्योगिकी, आबकारी, समाज कल्याण, अल्पसंख्यक कल्याण और MSME जैसे कई महत्वपूर्ण विभाग हैं। ऐसे में प्रश्नकाल से उनकी अनुपस्थिति लोकतांत्रिक जवाबदेही पर प्रश्नचिह्न खड़ा करती है।
उन्होंने बताया कि नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने भी मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर सत्र की अवधि बढ़ाने की मांग की है, ताकि महिला अपराध, कानून व्यवस्था, बेरोजगारी, महंगाई, भर्ती घोटालों और वित्तीय कुप्रबंधन जैसे मुद्दों पर विस्तृत चर्चा हो सके। कांग्रेस का कहना है कि पांच दिन का सत्र इन ज्वलंत विषयों पर व्यापक बहस के लिए अपर्याप्त है और विधानसभा केवल औपचारिकताओं का मंच नहीं होना चाहिए।
वहीं, भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस के आरोपों को निराधार बताया है। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष व राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट ने कहा कि सत्र की अवधि कार्यमंत्रणा समिति और सदन के बिजनेस द्वारा तय होती है, जिसमें विपक्ष भी शामिल रहता है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जिनके विधायक दिन में हंगामा और रात में सोने का काम करते हों, उनकी सत्र अवधि पर चिंता पाखंड है।
भाजपा का कहना है कि सार्थक चर्चा के लिए समय से अधिक मंशा का सही होना जरूरी है, जबकि कांग्रेस का आरोप है कि सरकार गंभीर मुद्दों से बचने की कोशिश कर रही है। अब निगाहें 9 मार्च से शुरू होने वाले सत्र पर टिकी हैं, जहां सत्ता और विपक्ष आमने-सामने होंगे।














