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हल्द्वानी।  उत्तराखंड डिप्लोमा इंजीनियर्स महासंघ ने अपनी लंबित मांगों को लेकर अब खुलकर मोर्चा खोल दिया है। 23 मार्च 2026 को शाखा हल्द्वानी द्वारा लोक निर्माण विभाग परिसर में आयोजित बैठक में प्रदेशभर के विभिन्न विभागों से जुड़े डिप्लोमा इंजीनियरों ने एकजुट होकर सरकार के प्रति गहरी नाराजगी जताई।

बैठक की अध्यक्षता मनोज भट्ट और संचालन मनमोहन सिंह बिष्ट ने किया बैठक में साफ तौर पर कहा गया कि वर्षों से चली आ रही मांगों पर सरकार का रुख उदासीन बना हुआ है, जिससे इंजीनियरों में असंतोष लगातार बढ़ रहा है।

महासंघ ने चेतावनी दी कि यदि जल्द ठोस निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा इंजीनियरों ने सबसे प्रमुख रूप से वेतन और पदोन्नति से जुड़ी विसंगतियों को उठाया। उनका कहना है कि कनिष्ठ अभियंताओं को 4600 ग्रेड पे का लाभ 1 जनवरी 2006 से न देकर बाद में लागू किया गया, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। इसके साथ ही पदोन्नति में लगातार हो रही देरी को लेकर भी तीखी नाराजगी व्यक्त की गई।

महासंघ का कहना है कि सेवा अवधि के आधार पर समयबद्ध पदोन्नति का प्रावधान लागू किया जाना चाहिए, जिससे कर्मचारियों को न्याय मिल सके बैठक में यह भी मांग उठी कि जनवरी 2014 के बाद नियुक्त कनिष्ठ अभियंताओं को 10 वर्ष की सेवा पूर्ण करने पर पूर्व की भांति 5400 ग्रेड पे दिया जाए। इसके अलावा पेयजल निगम और जल संस्थान के राजकीयकरण की मांग भी प्रमुखता से सामने आई, जिसे कर्मचारियों के हित में जरूरी बताया गया सबसे संवेदनशील मुद्दा पुरानी पेंशन योजना (OPS) की बहाली का रहा।

महासंघ ने स्पष्ट कहा कि 1 अक्टूबर 2005 से लागू नई पेंशन योजना (NPS) के स्थान पर फिर से OPS लागू की जाए, जिससे कर्मचारियों का भविष्य सुरक्षित हो सके वहीं एक अन्य महत्वपूर्ण मुद्दा पदोन्नति के सीमित अवसरों को लेकर उठा।

इंजीनियरों का कहना है कि विभागों में उच्च पदों की कमी के कारण सहायक अभियंताओं को आगे बढ़ने का अवसर नहीं मिल पा रहा है।

ऐसे में अन्य पर्वतीय राज्यों की तर्ज पर समानांतर पद सृजित कर पदोन्नति का रास्ता खोला जाना चाहिए बैठक में बड़ी संख्या में इंजीनियर मौजूद रहे महासंघ के पदाधिकारियों ने संकेत दिए कि यदि मांगों पर समयबद्ध कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को चरणबद्ध तरीके से तेज किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।

 

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