हल्द्वानी। पूर्व दर्जा राज्य मंत्री एवं प्रमुख राज्य आंदोलनकारी हरीश पनेरू के नेतृत्व में धरना प्रदर्शनय ज़िला दूर संचार माहाप्रबंधक के कार्यालय हल्द्वानी में प्रातः11 बजे से किया गया।
जिसमें दूरस्त क्षेत्रों में लगे टावरों को चालू करने एवं टावरों को लगाने में काम कर रहे मज़दूरों की मज़दूरी दिलाने की माँग की गई। पूर्व दर्जा राज्य मंत्री हरीश पनेरू ने कहा की दूरसंचार विभाग एवं भाजपा की केंद्र सरकार ने टावर लगाने के नाम पर पिछड़े क्षेत्र की जनता के साथ धोका किया है।
क्योंकि पिछले सात सालों से भाजपा के विधायक एवं सांसद घूम-घूमकर कहते थक नहीं रहे थे कि हम टावर लगवा रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में लगने वाले टावरों में अधिकतर क्षेत्रों में स्थानीय लोगों ने मज़दूरी पर काम इसलिए किया की हमारे क्षेत्र में टावर लग रहा है।
इसलिए हमारा दायित्व बनता है कि हम हाथ बटाकर काम पूरा करवा दे जिसका लाभ हमे नेटवर्क के रूप में मिलेगा लेकिन बड़े दुख की बात है कि ग्रामीण मज़दूरों कि बी एस एन एल विभाग के ठेकेदारों ने ग्रामीणों के कई लाखों रुपए सिर्फ़ भीमताल विधानसभा के ही शेष है।
जिसको लेकर समय समय पर दूरसंचार विभाग संबंधित ठेकेदार को अवगत कराने के बाद भी एक साल बीत जाने के बाद ना ही टावर चालू हो पाए और ना ही मज़दूरों की मज़दूरी मिल पाई।
इसलिए विभिन्न क्षेत्रों से आये ग्रामीण मज़दूरों ने बी एस एन एल कार्यालय में धरना प्रदर्शन कर हंगामा किया। धरनास्थल पर दूरसंचार विभाग के AGM श्री एल एम तिवारी अपनी टीम सहित धरनारत मज़दूरों से बातचीत करने पहुँचे।
जिस पर पूर्व दर्जा राज्य मंत्री हरीश पनेरू ने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा है की संबंधित ग्रामीण मज़दूर ज़्यादातर एस सी समुदाय के है इसलिए उनकी कोई सुनवाई नहीं कर रहा है।
ठेकेदार उनके साथ जातिसूचक शब्दों का भी इस्तेमाल करते हैं। AGM एल एम तिवारी द्वारा दूरसंचार विभाग के उच्च अधिकारियों से दिल्ली में वार्ता कर तीन दिन में मज़दूरों का भुगतान करने एवं टावरों को चालू करने के संबंध में कहा गया कि इस तरह के टावर पूरे देश में लगे है।
इसलिए इस पर निर्णय भारत सरकार से होना है फिर भीमताल पिछड़े क्षेत्र की समस्या को देखते हुए भी विधानसभा के टावरों को चालू करने के लिए उच्च अधिकारियों से निवेदन किया गया है।
इस अवसर पर ईश्वरी राम, भीम राम, पनी राम, प्रकाश चंद, पूरन पनेरू, हरीश मटियाली, सुरेश चंद, मुकेश कुमार आदि मौजूद थे।





