देशभर में पेंशनर्स के बीच केंद्र सरकार के “केंद्रीय सिविल सेवा (पेंशन) वैधता अधिनियम 2025” को लेकर नाराज़गी बढ़ती नजर आ रही है
हल्द्वानी। केंद्र सरकार के “केंद्रीय सिविल सेवा (पेंशन) वैधता अधिनियम 2025” को लेकर देशभर के पेंशनर्स में नाराज़गी बढ़ती जा रही है। ऑल इंडिया स्टेट पेंशनर्स फेडरेशन ने 25 मार्च 2026 को “विरोध दिवस” के रूप में मनाने का ऐलान किया है।
पेंशनर्स का आरोप है कि इस अधिनियम से 1 जनवरी 2026 से पहले सेवानिवृत्त हुए कर्मचारियों के साथ अन्याय हो रहा है और उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। उनका कहना है कि पेंशन योजना का मूल उद्देश्य सेवानिवृत्त कर्मचारियों को सम्मानजनक, स्वतंत्र और अभावमुक्त जीवन प्रदान करना है, जो उनके सेवा काल के जीवन स्तर के अनुरूप हो।
फेडरेशन के अनुसार मौजूदा प्रावधानों में यह आशंका जताई जा रही है कि संशोधित पेंशन योजना का लाभ केवल एक निश्चित तिथि के बाद रिटायर हुए कर्मचारियों को ही मिलेगा, जबकि उससे पहले सेवानिवृत्त लोगों पर बढ़ती महंगाई और गिरती क्रय शक्ति के प्रभाव को नजरअंदाज किया जा रहा है।
पेंशनर्स ने यह भी याद दिलाया कि सातवें वेतन आयोग ने 1 जनवरी 2016 से पहले और बाद में रिटायर हुए पेंशनर्स के बीच समानता की सिफारिश की थी, जिसे सरकार ने स्वीकार किया था।
उनका कहना है कि यदि इस मुद्दे पर समय रहते उचित निर्णय नहीं लिया गया, तो लाखों पेंशनर्स की आर्थिक स्थिति पर गंभीर असर पड़ सकता है।
