हल्द्वानी। महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और उत्तर प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री भारत रत्न पं.गोविन्द बल्लभ पंत की 138 वीं जयंती पूरे प्रदेश के साथ पूरे उत्तराखंड में जगह जगह धूमधाम से मनाई जा रही है।
इस दौरान संस्कृत कार्यक्रम के साथ-साथ जगह-जगह श्रद्धा सुमन अर्पित कर उनको याद किया जा रहा है।
हल्द्वानी के तिकोनिया स्थित पंत पार्क में पंडित गोविंद बल्लभ पंत की जयंती पर हल्द्वानी मेयर गजराज बिष्ट के अलावा जनप्रतिनिधियो ने माल्यार्पण कर उनको श्रद्धा सुमन अर्पित किये।
इस दौरान हल्द्वानी महापौर गजराज बिष्ट के अलावा कई जन प्रतिनिधि और समिति से जुड़े पदाधिकारी मौजूद रहे।
इस दौरान कई स्कूल बच्चों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम के साथ-साथ उनके योगदान को याद किया गया।
इस मौके पर मौजूद वक्तवाओ ने कहा कि महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी भारत रत्न पंडित गोविंद बल्लभ पंत, देशभक्त, समाजसेवी तथा कुशल प्रशासक के रूप में देश को नई दिशा देने के साथ ही कुली बेगारी प्रथा तथा जमींदारी उन्मूलन के लिए निर्णायक संघर्ष कर समाज में व्याप्त इन बुराइयों को मिटाने में अहम भूमिका निभाई।
इस अवसर पर हल्द्वानी के मेयर गजराज बिष्ट ने गोविंद बल्लभ पंत की मूर्ति पर माल्यार्पण कर उनको याद किया. इस मौके पर उन्होंने गोविंद बल्लभ पंत की जीवनी पर प्रकाश डालते हुए उनके मार्गों पर चलने का आह्वान किया।
मेयर गजराज बिष्ट ने कहा कि आज के युवाओं को उनके जीवन परिचय से सीख लेनी चाहिये. उन्होंने कहा कि यह हम सब का सौभाग्य है कि वे हमारे राज्य में जन्मे थे देश की आजादी में पंडित गोविंद बल्लभ पंत का बड़ा योगदान रहा और कुशल राजनीतिज्ञ होने के चलते उनको भारत रत्न से सम्मानित किया गया।
ये उत्तराखंड के साथ-साथ पूरे देश के लिए गौरव का विषय है गौरतलब है कि गोविंद बल्लभ पंत का जन्म उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले के खूंट गांव में 10 सितंबर 1887 को हुआ था. इनकी मां का नाम गोविंदी देवी और पिता का नाम मनोरथ पंथ था।
बचपन में पिता की मौत हो जाने के बाद उनकी परवरिश उनके नाना बद्री दत्त जोशी ने की. गोविंद बल्लभ पंत को 1937 से 1939 तक ब्रिटिश भारत में संयुक्त प्रांत के मुख्यमंत्री के रूप में पदभार दिया गया।
संयुक्त प्रांत में 1946 के चुनाव में कांग्रेस ने बहुमत हासिल किया और उन्हें दोबारा मुख्यमंत्री बनाया गया।
जिसके बाद गोविंद बल्लभ पंत 1946 से 1949 तक संयुक्त प्रांत (उत्तर प्रदेश) के सीएम रहे।
इसके बाद गोविंद बल्लभ पंत 1955 से 1968 तक गृह मंत्री भी रहे और 1971 में उनका निधन हो गया।














