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नैनीताल। हरियाली और समृद्धि का प्रतीक प्रसिद्ध हरेला पर्व की तैयारियां शुरू हो गई हैं। शनिवार को विधि-विधान से हरेला बोया जाएगा, इसके लिए लोगों ने पांच प्रकार के अनाज और टोकरी सहित अन्य सामग्री की खरीदारी की।

ज्योतिषाचार्य शेखर भट्ट ने बताया कि पर्वतीय अंचल में हरेला कहीं 10 दिन तो कहीं 11 दिन पूर्व बोया जाता है। ऐसे में आज और कल इसकी बुआई होगी।

गेहूं, धान, जौ आदि पांच या सात प्रकार के अनाज को मिलाकर टोकरियों में बोया जाएगा। शुक्रवार को लोगों ने हरेले के लिए बाजार से बीज, टोकरियों की खरीदारी की।

15 जुलाई को विधि-विधान से डिकरों का पूजन के साथ ही हरेले की गुड़ाई की जाएगी और 16 जुलाई को इसे शिरोधार्य किया जाएगा।

हरेला पर्व के दिन सुबह सबसे पहले पकवानों के साथ हरेला काटकर ईष्ट देव को अर्पित करने की परंपरा है और इसके बाद पारिवारिक सदस्यों का बड़े-बुजुर्ग हरेला से सिर पूजन करेंगे। 

हरेला बोने के लिए सूखी मिट्टी की जरूरत होती है। ऐसा नहीं होने पर अधिक नमी के चलते बीज बर्बाद होने की संभावना बढ़ जाती है।

लगातार बारिश के चलते मिट्टी अधिक गीली हो गई है, इससे लोग परेशान हैं।

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