मध्य पूर्व में जारी युद्ध के बीच भारत और ईरान ने एक महत्वपूर्ण समझौते पर सहमति जताई है। इसके तहत हर्मुज जलडमरूमध्य से भारतीय जहाजों को सुरक्षित रूप से गुजरने की अनुमति दी गई है।
मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच भारत और ईरान के बीच एक महत्वपूर्ण सहमति बनी है। इस समझौते के तहत हर्मुज जलडमरूमध्य से भारतीय जहाजों को सुरक्षित रूप से गुजरने की अनुमति दी गई है।
यह फैसला ऐसे समय में आया है जब क्षेत्र में युद्ध जैसी स्थिति के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव बना हुआ है।
सूत्रों के अनुसार ‘शिवालिक’ नामक जहाज करीब 40,000 मीट्रिक टन एलपीजी (तरल पेट्रोलियम गैस) लेकर भारत की ओर बढ़ रहा है और लगभग सात दिनों में भारतीय तट पर पहुंचने की संभावना है।
इसके अलावा एक अन्य जहाज भी इसी मार्ग से भारत की ओर आ रहा है।
बताया जा रहा है कि एलपीजी से भरा यह जहाज हाल ही में बंदर अब्बास बंदरगाह से रवाना हुआ है।
जहाज ने हर्मुज जलडमरूमध्य को पार कर लिया है और फिलहाल भारतीय नौसेना की निगरानी में अपनी यात्रा जारी रखे हुए है, ताकि युद्धग्रस्त समुद्री मार्ग में उसकी सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
इस मुद्दे पर भारत और ईरान के बीच कई दौर की वार्ता हुई। अंतिम स्तर की बातचीत नरेंद्र मोदी और मसूद पेज़ेशकियन के बीच हुई, जिसमें ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री सुरक्षा को लेकर सकारात्मक सहमति बनी।
दरअसल, 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल की ओर से ईरान पर सैन्य कार्रवाई की खबरों के बाद क्षेत्र में तनाव बढ़ गया था। इसके बाद ईरान ने हर्मुज जलडमरूमध्य के कुछ हिस्सों में आवाजाही सीमित कर दी थी, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार में हलचल मच गई और तेल-गैस की कीमतों में तेजी देखने को मिली।
हालांकि ईरान के भारत में राजदूत मोहम्मद फत्हाली ने स्पष्ट किया कि हर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह बंद नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि भारत हमारा मित्र देश है और साझा हितों को ध्यान में रखते हुए जहाजों के लिए सुरक्षित मार्ग सुनिश्चित किया जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इस मार्ग से जहाजों की आवाजाही सामान्य रहती है, तो इससे भारत की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी और वैश्विक ऊर्जा बाजार में भी स्थिरता आने की संभावना है।





