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नैनीताल में  विधि विधान के साथ भक्तों के दर्शन के लिए खुला मां नंदा सुनंदा का दरबार भक्त जान देर रात मंदिर प्रांगण में माता के दर्शन के लिए पहुंचे

रिपोर्टर गुड्डू सिंह ठठोला

 नैनीताल। प्रतिष्ठित माँ नन्दा देवी महोत्सव ब्रह्ममूर्त में पूजा अर्चना और विधि विधान के साथ ही भक्तों के दर्शनों के लिए खोल दिया गया है ।

माता का दरबार। भक्तों ने माँ नंदा सुनंदा के जयकारों के साथ आशीर्वाद लिया। हजारों की संख्या में पहुंचे भक्तजन पूजा अर्चना के लिए

      नैनीताल में आस्था का केंद्र प्रतिष्ठित माँ नंदा सुनंदा महोत्सव बीती 29 अगस्त को एक टोली के कदली वृक्ष लेने के लिए रवाना होने के साथ शुरू हो गया। राम सेवा सभा द्वारा भक्तों को माँ की प्रतिमा निर्माण में इस्तेमाल होने वाले कदली वृक्ष को लाने के लिए विदा किया।

भक्त 30 अगस्त को वृक्ष लेकर लौटे जिसके बाद उनका धूमधाम से स्वागत किया गया। जिसके बाद माँ नंद सुनंदा की प्रतिमा का निर्माण हुआ ।

आज तड़के सवेरे ब्रह्म मूर्त में माँ नयना देवी मंदिर परिसर में माँ नंदा सुनंदा की प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा के बाद माँ विराजमान हो गई।

आज से, देश दुनिया से दर्शनों के लिए आने वाले भक्तों के लिए माँ की प्रतिमा को खोल दिया गया है। पूर्णतः ईको फ्रेंडली तरीके से बनाए गई प्रतिमा को आगामी 5 सिंतबर तक दर्शनों के लिए रखा जाता है।

इसके बाद लगभग माँ को नगर भ्रमण के बाद नैनीझील में विसर्जित किया जाएगा। भक्तजन बकरों की पूजा करने के लिए मंदिर में लेकर आ रहे थे।

उत्तराखंड उच्च न्यायालय के आदेश के बाद बकरों की बलि के लिए स्थाई स्लॉटर हाउस बनान की अनुमति दी।

बकरों की पूजा अर्चना के बाद पुलिस कर्मियों की निगरानी में बकरों को वापस स्लॉटर हाउस को भेजा जा रहा था पूरे मेले की सुरक्षा के लिए पुलिस कर्मियों की तैनाती की गई है छपे छपे पर पुलिस तैनात है

वहीं श्रद्धालुओं का देर रात मंदिर में आना प्रारंभ हो गया था भक्तों की लंबी कतार देखने को मिली भक्तों ने कहां की कुमाऊं की जो कुलदेवी है नंदा सुन्दा देवी हुई। बहुत इंतजार रहता है का माता के दर्शन के लिए। और इसका हमें साल भर इंतजार रहता है।

पुरोहित भगवती प्रसाद जोशी ने कहा लोगों से यह प्रार्थना है की आस्था का सैलाब चल रहा है भाव में जो कमी है जब भाव में कमी आती है जो भजन हम गाते हैं।

वह भजन हमारे कानों को फिरता है आत्मा को नहीं झांझोरता आत्मा को कथा ही झांझोरती है।

जब हम धर्म की रक्षा करेंगे तो बदले में धर्म हमारी रक्षा करेगा। प्रकृति ने सुंदर सरोवर दिया है इस सरोवर की रक्षा करनी है। 

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