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नैनीताल का183वा जन्मदिवस मनाया जाएगा।

रिपोर्टर गुड्डू सिंह ठठोला

नैनीताल की खोज : संपूर्ण विश्व के समक्ष 1841 में पी. बैरन के प्रयासों से नैनीताल ने अपना अस्तित्व प्राप्त किया। भले ही नैनीताल 1841 में संपूर्ण विश्व के समक्ष आया हो परन्तु उससे पूर्व ही इसे पवित्र देव भूमि के नाम से जाना जाता है। पौराणिक कथाओं में स्कंद पुराण के मानस खंड में इसका उल्लेख है।

पौराणिक और रोचक तथ्य : नैनीताल से जुड़े कुछ पौराणिक और रोचक तथ्य है जो इसके पवित्र देव भूमि होने का प्रमाण देते है, नैनीताल को त्रि ऋषि सरोवर के नाम से पुकारा जाता था। कई समय पूर्व नैनीताल में तीन ऋषि अत्रि, पुलस्थय और पुलह तप करने आए थे।

उन्हें यहां पर पीने के लिए पानी नहीं मिला था तब उन्होंने यहां एक बड़ा गड्ढा कर उसमें कैलाश मानसरोवर का पानी भर दिया, मान्यतानुसार आज भी नैनी झील में स्नान करने वाले व्यक्ति को मानसरोवर में स्नान करने का पुण्य प्राप्त होता है।

नैनीताल का विश्व विख्यात शक्ति पीठ नयना देवी मंदिर लोगो के लिए आस्था का केंद्र है, माना जाता है कि जब शिव जी मां सती का अधजला íदेह लेकर तांडव कर रहे थे तब मां सती की बाई आंख यहां पर गिर गई थी, तत्पश्चात यह मां नयना देवी मंदिर की स्थापना की गई।

जिस कारण इस स्थान का नाम नैनताल पड़ा। बाद में इसे परिवर्तित करके इसका नाम नैनीताल रख दिया गया। मां नयना देवी मंदिर 51 शक्तिपीठों में से एक है।

आखिर क्या है नैनीताल के मशहूर होने का कारण ?
नैनीताल एक पर्यटक स्थल होने के साथ एडवेंचर्स से भी परिपूर्ण स्थल है, जिस कारण इसकी लोकप्रियता अत्यधिक है। नैनीताल अपने घुड़सवारी, रॉक क्लाइंबिंग, साइक्लिंग, लिफ्टिंग, बोटिंग, पौराणिक मंदिरों और ठंडे वातावरण के कारण मशहूर है।
शक्तिपीठों में से एक नयना देवी मंदिर, गुरुद्वारा, नगर पालिका भवन और इसके साथ ही नगर पालिका भवन ऊपर लगी घड़ी, न्यू क्लब ,बोट हाउस क्लब, सी,आर, एस,टी इंटर कॉलेज एशिया का पहला मेथोडिस्ट चर्च ओर जामा मस्जिद मात्र सौ मीटर के दायरे में होना इसकी प्रमुख विशेषताएं है।
आपको बता दे कि इस बार नैनीताल का 183वा जन्मदिवस मनाया जाएगा।

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