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भारत के पड़ोसी देश नेपाल में हिन्दू राष्ट्र की मांग तेज हो गई है। इससे पहले ये मांग छोटे स्तरों पर होती रही थी लेकिन अब ये मांग नेपाली राजनीति की सबसे पुरानी पार्टी नेपाली कॉन्ग्रेस के भीतर भी होने लगी है।

काठमांडू में चल रही 14वीं ‘महासमिति’ बैठक के दौरान पार्टी की सामान्य समिति के लगभग 950 सदस्यों ने नेपाल में हिंदू राज्य की बहाली के लिए एक याचिका पर हस्ताक्षर किए हैं। जानकारी के मुताबिक 2,200 से अधिक नेपाली कांग्रेस प्रतिनिधि महासमिति की बैठक में भाग ले रहे हैं, जिसे पार्टी की सर्वोच्च-स्तरीय नीति-निर्धारण इकाई माना जाता है।

नेपाली कांग्रेस मे विधायक और पार्टी की केंद्रीय कार्य समिति के सदस्य शंकर भंडारी, हिंदू राज्य की बहाली के लिए नेपाली कांग्रेस में अभियान का नेतृत्व कर रहे हैं। अभियान के एक अन्य नेता लोकेश ढकाल ने कहा कि अभी तक 950 से अधिक सामान्य समिति सदस्यों ने हिंदू राज्य की बहाली के लिए याचिका पर हस्ताक्षर किए हैं। आगे और भी हस्ताक्षर कराए जाने हैं।

हिंदू समर्थक प्रचारकों ने कहा है कि सामान्य समिति के अधिकांश सदस्य हिंदू राज्य के पक्ष में हैं, इसलिए नेपाली कांग्रेस को इस क्षण का नेतृत्व करना चाहिए। हालांकि नेपाली कांग्रेस के अध्यक्ष और पूर्व पीएम नेपाल को फिर से हिन्दू राष्ट्र बनाए जाने के पक्ष में नहीं हैं।

हस्ताक्षर अभियान से जुड़ी डॉ डिला संग्रौला ने कहा कि 50 फीसदी सदस्यों के हस्ताक्षर के बावजूद अगर पार्टी इस मुद्दे पर चुप्पी साधे हुए है तो इससे भविष्य में पार्टी के भीतर विद्रोह हो सकता है। उन्होंने कहा कि पार्टी अध्यक्ष ने उन्हें भरोसा दिलाया है कि कल महासमिति बैठक के आखिरी दिन मुद्दे पर कोई निर्णय लिया जा सकता है।

नेपाली कांग्रेस के अलावा नेपाल की दो अन्य सबसे बड़ी पार्टियां, सीपीएन-यूएमएल और सीपीएन (माओवादी सेंटर) हिंदू राज्य की बहाली के एजेंडे पर चुप हैं। हालाँकि, संसद में चौथी सबसे बड़ी पार्टी, राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी, नेपाली कांग्रेस के साथ सुर में शामिल हो गई है। राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी ने राजशाही समर्थक और हिंदू समर्थक पार्टियों के एजेंडे की वकालत की है।

आज बुधवार को राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी ने हिंदू राज्य और राजशाही की बहाली की मांग को लेकर काठमांडू में एक रैली की और प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल को 40 सूत्री एजेंडा सौंपा। पार्टी अगले महीने से काठमांडू में विरोध प्रदर्शनों की एक श्रृंखला आयोजित करने की योजना बना रही है जिसका एक प्रमुख एजेंडा नेपाल में हिंदू राज्य और राजशाही की बहाली है।

क्यों बढ़ी हिन्दू राष्ट्र की मांग?

नेपाली पार्टियों की नजर में यह मांग तेज होने का सबसे बड़ा कारण ये है कि नेताओं को लगता है कि धर्म का इस्तेमाल राजनीति के लिए किया जा सकता है। कुछ लोग नेपाली कांग्रेस में ‘हिंदू राष्ट्र’ की मांग बढ़ने को देश में भारत की सत्तारूढ़ पार्टी बीजेपी के बढ़ते प्रभाव के संकेत के रूप में भी देखते हैं।

बीबीसी से बात करते हुए राजनीति विज्ञान के प्रोफेसर कृष्णा खनाल ने कहा, ”अब कांग्रेस पतन की ओर है। राजनेता सोच सकते हैं कि क्या धर्म की राजनीति मतदाताओं को आकर्षित कर सकती है। इसके अलावा दूसरा भारतीय प्रभाव भी है। भारत में बीजेपी का प्रभाव है। नेपाल की राजनीति पर उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड का व्यापक प्रभाव है। खासकर नेपाल में योगी आदित्यनाथ का प्रभाव है।”

नेपाल में किन धर्मों के लोग हैं?

साल 2021 की जनगणना के मुताबिक नेपाल में हिंदू आबादी 81 फीसदी है। इसके बाद 8 फीसदी के साथ बौद्ध धर्म के लोग हैं। इसके बाद 5 फीसदी लोग मुस्लिम धर्म को मानने वाले हैं। नेपाल में हिन्दू और बौद्ध भले ही सबसे अधिक हैं मगर हाल में इनकी जनसंख्या का प्रतिशत कम हुआ है।

वहीं, मुस्लिम धर्म को मानने वाले लोगों की संख्या में काफी तेजी से इजाफा हुआ है। एक दशक पहले जहां नेपाल में 4 फीसदी लोग मुस्लिम थे, वे अब बढ़कर 5 फीसदी हो चुके हैं। जनगणना रिपोर्ट के अनुसार, हिंदू और बौद्ध धर्म के अनुयायियों में क्रमशः 0.11 प्रतिशत और 0.79 प्रतिशत की गिरावट आई है।

मुस्लिमों की अचानक बढ़ी आबादी से हिन्दुओं का एक वर्ग सतर्क हो गया है जिसका फायदा अब नेता उठाना चाह रहे हैं। आपको बता दें कि नेपाल 28 मई 2008 को आधिकारिक तौर पर एक गणतंत्र बना था। तब नेपाल की संविधान सभा की पहली मीटिंग हुई थी, जिसके बाद शाह राजाओं की 240 साल से चली आ रही राजशाही का अंत हुआ था।

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