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नैनीताल में कुमाऊं विश्वविद्यालय के हर्मिटेज सभागार में विज्ञान दिवस पर गोष्ठी का किया गया आयोजन 

रिपोर्टर गुड्डू सिंह ठठोला

नैनीताल। कुमाऊं विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के अवसर पर आज कुमाऊँ विश्व विद्यालय के हर्मिटेज सभागागार में संगोष्ठी का आयोजन किया गया। विज्ञान दिवस पर कुमाऊँ विश्व विद्यालय द्वारा विभिन्न प्रतियोगिताओं में प्रतिभाग करने वाले छात्र छात्राओं को कुलपति दीवान सिंह ने पुरस्कृत किया।

उन्होंने कहा विज्ञान दिवस मनाने का मुख्य उद्देश्य युवाओं, खास तौर पर विद्यार्थियों को विज्ञान के प्रति प्रेरित करना तथा लोगों को विज्ञान एवं वैज्ञानिक उपलब्धियों के प्रति सजग बनाना है। ताकि छात्र विज्ञान के क्षेत्र में उपलब्धि हासिल कर समाज के लिए बेहतर काम कर सके।

हुए कुलपति कुमाऊँ विश्वविद्यालय प्रो० दीवान एस रावत ने कहा कि अब देश इंडीजेनस ज्ञान से विकसित भारत की तरफ बड़ रहा है।

भारत की ज्ञान परंपरा का अतीत प्राचीन एवं गौरवपूर्ण रहा है। बोधायन, कात्यायन, आर्यभट्ट, चरक, कणाद, वाराहमिहिर, नगार्जुन, अगस्त, भर्तृहरि, शंकराचार्य, स्वामी विवेकानंद जैसे अनेक महापुरुषों ने भारत भूमि पर जन्म लेकर अपनी प्रतिभा व मेधा से विश्व में भारतीय ज्ञान परंपरा के समृद्धि हेतु अतुलनीय योगदान दिया है।

अंग्रेजों ने सदियों से चली आ रही भारतीय ज्ञान परंपरा की न केवल उपेक्षा की, बल्कि उसे नष्ट-भ्रष्ट भी किया। वे कला, संगीत, साहित्य, न्याय, दर्शन, स्थापत्य, मूर्तिकला, योग, धातु विज्ञान, वस्त्र-निर्माण, रसायनशास्त्र, गणित, खगोल, ज्योतिष, चिकित्सा और कृषि आदि विविध क्षेत्रों में भारतीयों की समृद्ध एवं गौरवशाली ज्ञान परंपरा से भली तरह परिचित थे।

वे जानते थे कि इनके रहते भारतीयों को वास्तविक अर्थों में परतंत्र एवं परावलंबी नहीं बनाया जा सकता। इसलिए उन्होंने तमाम नीतियों एवं योजनाओं द्वारा पहले तो ज्ञान के इन परंपरागत स्रोतों को नष्ट किया और फिर सुनियोजित तरीके से इन सबके प्रति हम भारतीयों में हीन भावना विकसित की।

उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान, संस्कृति और परंपराओं में ही वह सामर्थ्य है, जिससे भारत अकेले ही नहीं बल्कि पूरे विश्व को शांति पथ पर ला सकता है। 

इस अवसर पर फेलो ऑफ नेशनल एकेडमी प्रो० रूप लाल ने कहा कि हमारे दैनिक जीवन से लेकर ब्रह्मांड में घटित होने वाली सभी घटनाओं के पीछे कोई न कोई विज्ञान छिपा हुआ है।

हमें बस जरूरत है, तो उसे समझने और सामने लाने की। उन्होंने कहा कि हमने 30 सालो में विज्ञान के दम पर बहुत उन्नति की है। विज्ञान है, तो हम है।

विकास के पथ पर कोई देश तभी आगे बढ़ सकता है जब उसकी आने वाली पीढ़ी के लिये सूचना और ज्ञान आधारित वातावरण बने और उच्च शिक्षा के स्तर पर शोध तथा अनुसंधान के पर्याप्त संसाधन उपलब्ध हों। विज्ञान-प्रौद्योगिकी और शोध के दम पर ही हम 2047 तक विकसित भारत बन सकते हैं।

इस अवसर पर स्वामी राम हिमालयन विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ० राजेंद्र डोभाल ने कहा कि वैज्ञानिक सोच और उसके आधार पर जब हमारे देश में सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक निर्णय लेने की शुरूआत एक अनिवार्य प्रक्रिया के रूप में हो जाएगी, तब ही हम गरीबी, बेरोजगारी और विदेशों में प्रतिभा के पलायन को समाप्त करने की दिशा में ठोस कदम उठा पाएंगे।

कार्यक्रम का संचालन करते हुए प्रो० ललित तिवारी ने राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के सन्दर्भ प्रकाश डाला।कार्यक्रम में अतिथियों को पुष्प गुच्छ भेट किए गए तथा कुलगीत एवम राष्ट्रगान से कार्यक्रम प्रारंभ हुआ ।

संकायाध्यक्ष प्रो चित्रा पांडे ने सभी का स्वागत करते हुए कार्यक्रम की रूप रेखा रखी ।प्रो नीता बोरा शर्मा निदेशक ने भी शुभकामनाएं दी । कुमाऊनी कविताओं की फिल्म आंग वॉल नए कहा की फिल्म पलायन एवम कविताओं पर आधारित है।

जिसमें हम मिट्टी की सुगंध नजर आती है । शोधार्थियों एवम विद्यार्थियों ने अ गवाल फिल्म देखी अतिथियों को शॉल उड़ाकर तथा हर्षित द्वारा तैयार उनके पेंसिल चित्र भेट कर सम्मानित किया गया ।

क्विज तथा डिबेट के विजेताओं को नकद पुरुस्कार 1000,800,500 तथा प्रमाण पत्र दिए गए ।इस अवसर पर बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे ।

कार्यक्रम में प्री अतुल जोशी ,प्रो संजय पंत ,प्रो एम सी जोशी ,प्री एनजी साहू ,,प्रो सुच्ची बिष्ट ,प्रो गीता तिवारी, प्रो ज्योति जोशी ,डॉक्टर पैनी जोशी ,डॉक्टर महेंद्र राणा ,डॉक्टर रितेश साह ,डॉक्टर नवीन पांडे, डॉक्टर हेम भट्ट , स्वाति ,गीतांजलि ,प्रांजलि , नितवाल, इंद्र , अरविंद , प्रोफेसर ललित तिवारी, जतिन ,कविता , सहित विद्यार्थी उपस्थित रहे ।

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