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नैनीताल।  रविवार को आए भीषण तूफान और ओलावृष्टि ने भारी तबाही मचाई। तेज हवाओं के कारण कई पेड़ जड़ से उखड़ गए और उनकी टूटी टहनियों की चपेट में आकर बिजली की लाइनें क्षतिग्रस्त हो गईं। इसके चलते शहर के बड़े हिस्से में 24 से 36 घंटे तक बिजली आपूर्ति पूरी तरह ठप रही।

बिजली गुल होने से जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ। पद्मपुरी, ओखलकांडा, सूखाताल और पाइंस सहित आसपास के क्षेत्रों की करीब 80 हजार आबादी को भारी परेशानी झेलनी पड़ी। बिजली बाधित होने से न सिर्फ आम जनजीवन अस्त-व्यस्त हुआ, बल्कि पर्यटन पर निर्भर व्यवसाय और अदालती कार्यवाही भी प्रभावित हुई।

अधिकारियों के अनुसार उत्तराखंड पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (यूपीसीएल) को इस प्राकृतिक आपदा से करीब 50 से 60 लाख रुपये का नुकसान हुआ है। विभाग की टीमें चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में लगातार मरम्मत कार्य में जुटी रहीं।

यूपीसीएल के कुमाऊं जोन के मुख्य अभियंता राजेंद्र गुंजयाल ने बताया कि बिजली बहाली विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकता रही, जबकि अन्य नुकसानों का आकलन बाद में किया जाएगा।

इस दौरान बिजली संकट ने स्थानीय कारोबारियों, खासकर पर्यटन उद्योग से जुड़े लोगों की मुश्किलें बढ़ा दीं। पहले से एलपीजी की कमी झेल रहे व्यापारियों को अपना कामकाज बंद करना पड़ा, जिससे उन्हें अतिरिक्त आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा।

राज्य आंदोलनकारी हरीश पनेरु ने भीमताल विधानसभा क्षेत्र हुई अतिवृष्टि व आंधी तूफान से हुए नुकसान का जायजा लिया। हरीश पनेरू बताया कि लोगों की गेहूं की लहलहाती फसल बर्बाद हो गई है।

वहीं कई लोगों के घरों की छत  उड़ गई हैं। अतिवृष्टि से पीड़ित लोग दूसरे के यहां शरण लेकर रहने को मजबूर हैं।

उन्होंने प्रशासन से भीमताल विधानसभा में आंधी तूफ़ान व अतिवृष्टि से हुए नुकसान का आकलन कर मुवावजा देने की मांग की है।

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