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सरकारी विभागों की मिली भगत से होता अतिक्रमण

आंखें मुंदे बैठा वन विभाग हजारों परिवारों ने किया जमीन पर कब्जा।

रामनगर। मुख्य शहर से लगा हुआ है पूछड़ी। इसका कुछ हिस्सा नगरपालिका तो कुछ गांव में है। करीब 800 बीघा पक्की राजस्व भूमि वाले इस इलाके में स्थानीय के साथ-साथ बाहर से आकर भी लोग बसने लगे।

धीरे-धीरे आबादी का विस्तार होता गया और लोगों ने इससे सटे तराई पश्चिमी वन प्रभाग के वन क्षेत्र में भी कब्जा शुरू कर दिया।पर्यटन नगरी रामनगर भी धीरे-धीरे डेमोग्राफिक चेंज की जद में आता जा रहा है। इसकी शुरुआत पूछड़ी क्षेत्र से हो रही है। इस क्षेत्र में बाहर से आए मुस्लिम परिवारों की आबादी बढ़ी है और वन भूमि पर भी आशियाने बन गए हैं

वन विभाग का कहना है कि उनकी भूमि पर 1002 परिवार अतिक्रमण करके बैठे हैं। विभाग भी मानता है कि दस-दस रुपये के स्टांप में राजस्व से लगी वन विभाग की भूमि पर कब्जा हुआ है।

जिम्मेदारों की बेपरवाही ही कहेंगे कि यहां बिजली, पानी व पहचान पत्र की सुविधा भी दी गई है। हालात यह है कि राजस्व क्षेत्र में बसी फौजी कालोनी के कुछ हिस्से को अब रहमतनगर का नाम दे दिया है।

दस-दस के स्टांप पेपर में बिकती गई जमीन

इस कब्जे वाली भूमि को तमाम लोग स्टांप पेपर व मौखिक रूप से दूसरों को बेचकर चलते बने। वर्ष 2004-05 से वन क्षेत्र की यह जमीन दस-दस रुपये के स्टांप पेपर में एक से दूसरे को बिकती चली गई।

सबसे ज्यादा उप्र के रामपुर, मुरादाबाद व स्वार तथा काशीपुर के सुल्तानपुर पट्टी क्षेत्र से मुस्लिम वर्ग के लोग यहां आकर सस्ती जमीन खरीदकर बसते चले गए और वन क्षेत्र में अतिक्रमण का भी विस्तार होता चला गया।

वन क्षेत्र में बसी इस जगह को पूछड़ी नई बस्ती के रूप में पहचान दे दी गई। एक-दो मुस्लिम परिवार यहां कारोबार के लिए घोड़ा बुग्गी लेकर आए थे, जो आज वन विभाग की अच्छी खासी जमीन पर कुंडली जमाए बैठे हैं। अब बुग्गी की जगह उनके डंपर और ट्रक चल रहे हैं। जगह-जगह बांस व घास के अलावा तिरपाल डालकर झोपड़ी बनी हैं।

अवैध कब्जे का यह खेल वन विभाग के उस क्षेत्र के रखवालों के संरक्षण में पनपता रहा। लोग वन क्षेत्र में नदी तक बसते चले गए।

हाई कोर्ट के आदेश पर प्रशासन व वन विभाग की ओर से वर्ष 2017 में 36 लोगों के पक्के अतिक्रमण ध्वस्त भी किए गए थे।

लेकिन इसके बाद स्थिति फिर पहले की तरह होती चली गई। पूरे इलाके में वर्तमान में मतदाताओं की संख्या 3500 हो चुकी है।

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