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नैनीताल जिले के खाद्य विभाग से रिटायर्ड अधिकारी को डिजिटल अरेस्ट कर एक करोड़ दो लाख की ठगी करने वाले दो आरोपितों को एसटीएफ ने गिरफ्तार कर लिया है। दोनों आरोपितों से पूछताछ के बाद उन्हें कोर्ट में पेश किया गया।

जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया। पूछताछ में आरोपितों ने कई बड़े खुलासे किए। दोनों पर मुंबई, बिहार, झारखंड सहित अन्य स्थानों पर धोखाधड़ी के मामले पंजीकृत हैं।

मुखानी हल्द्वानी, जिला नैनीताल निवासी हरसिंह अधिकारी खाद्य विभाग से रिटायर्ड हो चुके हैं। मार्च, 2025 में अज्ञात नंबर से काल आई और उन्हें मोबाइल नंबर को बंद होने की बात कहकर खुद को टेलीकाम डिपार्टमेंट का अधिकारी बनकर बात की। बुधवार को राजफाश के दौरान वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, एसटीएफ नवनीत सिंह ने बताया कि आरोपितों ने डरा धमकाकर ईडी और सीबीआई का हवाला देकर उन्हें 10 दिनों तक डिजिटल अरेस्ट रखा। इस बीच अलग-अलग खातों में कुल 1.02 करोड की धनराशि धोखाधड़ी पूर्वक जमा करा ली।

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, एसटीएफ के निर्देश पर पर्यवेक्षण अपर पुलिस अधीक्षक स्वप्न किशोर, प्रभारी निरीक्षक एवं विवेचक अरूण कुमार, साईबर क्राईम पुलिस स्टेशन कुमाऊं को जिम्मेदारी सौंपी गई। जिसपर साइबर सेल ने घटना में प्रयुक्त बैंक खातों, रजिस्टर्ड मोबाइल नंबरों, व्हाट्सअप की जानकारी के लिए संबंधित बैंकों, सर्विस प्रदाता कंपनी, मेटा कंपनी से पत्राचाकर कर डेटा प्राप्त किया। प्राप्त डेटा के विश्लेषण से जानकारी में आया कि साइबर अपराधियों ने घटना में पीड़ित को डिजिटली अरेस्ट कर विभिन्न बैंक खातों में धनराशि स्थानांतरित कराई गई।

पड़ताल के दौरान मोबाइल नंबरों और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर अभियुक्त अजय कुमार सिन्हा पुत्र स्व. गिरिश नारायण निवासी शिवपुरी टिकिया टोली गांव थाना सुल्तानगंज पटना बिहार तथा उसका पुत्र सौरभ शेखर की तलाश शुरू कर दी। बैंकिग ट्राजेक्शन, नेट, मोबाईल बैकिंग की आईपी एक्ड्रेस, मोबाईल नंबरों की सीडीआर, ईमेल आईडी, जीमेल आदि पर तकनीकी व मैनुअली कार्य करते हुए झारखण्ड पुलिस की साहयता से रांची झारखंड से गिरफ्तार कर लिया।

जिसके बाद न्यायालय में पेश कर अजय कुमार सिन्हा व उसके पुत्र सौरभ शेखर न्यायिक हिरासत में केंद्रीय कारागार भेजा गया। दोनों आरोपितों पर रांची झारखंड में भी इसी प्रकार से एक महिला को डिजीटली अरेस्ट कर 55 लाख रूपये की साईबर धोखाधडी का अभियोग पंजीकृत है।

आरोपित पीडितों को टेलीकाम अथारिटी का अधिकारी बताकर उनके मोबाईल नंबर बंद होने संबंधी ईडी (प्रवर्तन निदेशालय), सीबीआई का आदेश होने की बात कहकर, आधार कार्ड से फर्जी खाता खुलने तथा ह्यूमन ट्रैफिकिंग की बात कहकर डिजिटली अरेस्ट कर लिया जाता था।

जिसके बाद पीडित को बताया जाता था कि कोर्ट की ओर से उसके केस को आनलाइन सुने जाने की अनुमति मिलने की बात कही जाती थी, जिसके लिये पीडितों को व्हाटसप पर ही गाइडलाईन भी भेजी जाती थी तथा प्रोटोकॉल बनाये रखने के लिये बताया जाता था, अभियुक्तो द्वारा पीडितों से डिजिटली अरेस्टिंग के दौरान लगातार व्हाटसप के माध्यम से जुडा रहता था। जिसके लिये प्रत्येक घंटे में पीडित व्हाटसप से जानकारी प्रदान करनी होती थी।

आरोपित पीडित से धोखाधडीपूर्वक प्राप्त की गयी धनराशि को तत्काल ही अन्य खातों में स्थानांतरित कर दिया जाता था। आरोपित अजय कुमार सिन्हा की ओर से साईबर धोखाधडी के लिए अपने पुत्र सौरभ शेखर के साथ मिलकर महिला एंव ग्रामीण विकास कल्याण समिति के नाम से एनजीओ पटना बिहार में पंजीकृत कराई गई, जिसका संचालन सौरभ करता था। इसके बैंक खाते में पीड़ित के 14,51,000 रूपये मंगाया गया था।

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