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कौशल से सशक्त युवा : परिवर्तन की ओर एक दृढ़ कदम

रिपोर्टर गुड्डू सिंह ठठोला 

नैनीताल। भारतीय शहीद सैनिक विद्यालय में विश्व युवा कौशल दिवस के उपलक्ष्य में एक प्रेरणादायक कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसका उद्देश्य विद्यार्थियों में कौशल विकास, सामाजिक चेतना और राष्ट्र निर्माण की भावना को प्रोत्साहित करना था। इस आयोजन में विद्यालय की एनएसएस इकाई एवं इको क्लब की सक्रिय भूमिका रही।

कार्यक्रम की शुरुआत प्रार्थना सभा के साथ हुई, जिसमें समस्त शिक्षकगण, छात्र-छात्राएं तथा प्रधानाचार्य श्री बी. एस. मेहता सहित अन्य शिक्षकगण उपस्थित रहे। सभा में प्रधानाचार्य महोदय ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि “आज का युवा अगर अपने कौशल को सही दिशा में लगाए, तो वह न केवल अपने भविष्य को संवार सकता है, बल्कि राष्ट्र की प्रगति में भी अभूतपूर्व योगदान दे सकता है। बदलाव की राह में सबसे पहला कदम आत्मचिंतन और आत्मविकास का होना चाहिए।”

कार्यक्रम के अंतर्गत “हम परिवर्तन तो चाहते हैं, पर शुरुआत कौन करेगा?” विषय पर भाषण प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इसमें छात्रा काव्या जोशी ने अपने सारगर्भित विचारों से सभी को यह सोचने पर विवश कर दिया कि परिवर्तन किसी चमत्कार का नाम नहीं, बल्कि हर नागरिक की व्यक्तिगत जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि जब प्रत्येक युवा अपने कर्तव्यों को समझेगा, तभी देश में सच्चा परिवर्तन संभव होगा।

इसके पश्चात शहीद भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु पर आधारित एक रोचक क्विज प्रतियोगिता का आयोजन कक्षा 6, 7 एवं 8 के विद्यार्थियों के बीच कराया गया, जिसमें छात्रों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। विद्यार्थियों की देशभक्ति और जिज्ञासा देखने योग्य थी।

इसके अतिरिक्त निबंध लेखन एवं पोस्टर निर्माण प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया, जिनमें विद्यार्थियों ने “युवा शक्ति और कौशल विकास” जैसे विषयों पर अपनी रचनात्मकता और विचारों को प्रभावी रूप से प्रस्तुत किया।

एनएसएस प्रभारी  मीनाक्षी बिष्ट ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि “परिवर्तन संसार का शाश्वत नियम है और आज का युवा ही इस परिवर्तन का वास्तविक वाहक है।

यदि युवा संवेदनशील, जागरूक और कौशलयुक्त होंगे, तो समाज की तस्वीर अवश्य बदलेगी।” उन्होंने विद्यार्थियों को कई महान व्यक्तित्वों के विचारों से भी प्रेरित किया।

उप-प्रधानाचार्य  प्रवीण सती ने कहा कि “विश्व युवा कौशल दिवस केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि आत्मविश्लेषण का दिन है — यह सोचने का अवसर कि हम अपनी क्षमताओं का उपयोग समाज की भलाई में कैसे कर सकते हैं।”

इस पूरे आयोजन ने विद्यार्थियों को न केवल मंच दिया, बल्कि यह भी सिखाया कि परिवर्तन की शुरुआत स्वयं से होती है। जब युवा ठान लें, तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं।
कार्यक्रम प्रेरणादायक, ज्ञानवर्धक और पूर्णतः सफल रहा।

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