ब्रेकिंग न्यूज़
खबर शेयर करे -

मतदाता सूची में दो जगह नाम होने या दो अलग-अलग निर्वाचन क्षेत्रों से [एसआईआर संबंधी फॉर्म] भरने को कई लोग सामान्य गलती मान लेते हैं, लेकिन कानून इसे गंभीर अपराध मानता है।

[लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1950] के तहत किसी व्यक्ति का नाम एक से अधिक स्थानों की वोटर लिस्ट में दर्ज होना या जानबूझकर गलत जानकारी देना दंडनीय है।

चुनाव आयोग अब डिजिटल डेटा मिलान के ज़रिए ऐसे मामलों पर पहले से ज़्यादा सख्ती से नज़र रख रहा है।

उत्तराखंड में आम है यह समस्या

उत्तराखंड जैसे राज्यों में बड़ी संख्या में लोग रोज़गार, पढ़ाई या कारोबार के लिए गांव से शहर की ओर आते-जाते रहते हैं।

कई मतदाताओं का नाम अभी भी उनके गांव की वोटर लिस्ट में दर्ज है, जबकि उन्होंने शहर में नया वोटर कार्ड बनवा लिया है। नतीजा यह होता है कि उनका नाम दो जगह की मतदाता सूची में सक्रिय रहता है – एक बार गांव में और दूसरी बार शहर में।

विशेषज्ञों के मुताबिक, पहाड़ी क्षेत्रों से मैदानी शहरों की ओर पलायन के कारण डुप्लीकेट वोटर एंट्री की समस्या और बढ़ जाती है, क्योंकि लोग पता बदल तो लेते हैं, लेकिन पुरानी मतदाता एंट्री हटवाने पर ध्यान नहीं देते।

ऑनलाइन अपना नाम कैसे हटवाएं (Form-7)

चुनाव आयोग ने पूरी प्रक्रिया को डिजिटल बना दिया है, ताकि मतदाता घर बैठे अपनी जानकारी अपडेट कर सकें।

[चुनाव आयोग की आधिकारिक वेबसाइट] या संबंधित [स्टेट इलेक्शन पोर्टल] पर लॉगिन करें।

मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए उपलब्ध [Form-7] विकल्प चुनें।

सही विधानसभा क्षेत्र, पुराना पता और आवश्यक विवरण सावधानी से भरें।

मांगे गए दस्तावेज़ (पता प्रमाण, पहचान पत्र आदि) की स्कैन कॉपी अपलोड करें।

फॉर्म ऑनलाइन सबमिट करने के बाद आपको एक रेफरेंस नंबर मिल जाएगा, जिसके जरिए आप आवेदन की स्थिति ट्रैक कर सकते हैं।

प्रक्रिया पूरी होने पर आपका नाम उस विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची से हटा दिया जाएगा, जबकि जहां आप वास्तव में रहते हैं वहां की वोटर लिस्ट में आपका नाम बरकरार रह सकता है या नया पंजीकरण हो सकता है।

यह भी पढ़ें :  नशे की लत में दरिंदगी, दिव्यांग ई-रिक्शा चालक की हत्या,तीन बच्चों के सिर से उठा पिता का साया
error: Content is protected !!