उत्तराखंड की सियासत में पिछले कुछ दिनों से तेजी से घटनाक्रम बदल रहे हैं। ऐसे में सियासी गलियारों में ये सवाल उठ रहा है कि आखिर क्या बड़ा होने जा रहा है। पहले विधायकों की देहरादून से दिल्ली दौड़ और देहरादून में विधायकों की सीएम धामी से मुलाकात का दौर थमने का नाम नहीं ले रहे हैं।
इस बीच सीएम धामी ने भाजपा के दिग्गज नेता पूर्व सीएम, पूर्व राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी से मुलाकात की। जिसके बाद एक बार फिर सियासी पारा चढ़ गया है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में कुछ बड़ा निर्णय लिया जा सकता है। उत्तराखंड में इस समय दो तरह के विकल्पों पर ही सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है।
एक धड़ा मंत्रिमंडल विस्तार का दावा कर रहा है, जबकि दूसरा धड़ा प्रदेश में फिर से सत्ता परिवर्तन को लेकर कयासबाजी कर रहा है। आइए जानने की कोशिश करते हैं कि इन बातों को जोर कहां से मिला। करीब एक हफ्ते पहले दिल्ली में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट के घर पर सांसदों की बैठक बुलाई गई। इस बैठक में सीएम धामी, प्रदेश प्रभारी दुष्यंत कुमार मौजूद रहे।
इसके साथ ही सांसदों में अजय टम्टा, अजय भट्ट और मालाराज्य लक्ष्मी शाह ही नजर आई। गढ़वाल से सांसद अनिल बलूनी नहीं पहुंचे, जबकि हरिद्वार सांसद और पूर्व सीएम त्रिवेंद्र रावत मीटिंग में आए और तुरंत अंदर से बाहर निकल गए। इस बैठक के बाद दावा किया गया कि त्रिवेंद्र रावत नाराज हैं। इसके बाद त्रिवेंद्र और बलूनी ने प्रभारी दुष्यंत गौतम से मुलाकात की।
बाद में त्रिवेंद्र की पूर्व सीएम विजय बहुगुणा और पूर्व सीएम रमेश पोखरियाल निशंक से भी मुलाकात के फोटो सामने आई। इन मुलाकातों के बीच विधायक उमेश शर्मा काउ और अरविंद पांडेय की दिल्ली में अमित शाह और केंद्रीय नेतृत्व से मुलाकात की फोटो जारी हुई।
विधायक सीएम धामी से मिले
देहरादून में भी कुछ विधायक सीएम धामी से मिले। जिसके बाद ये माना जा रहा है कि प्रदेश में कुछ बड़ा होने जा रहा है। गुरुवार देर शाम को सीएम धामी, भगत सिंह कोश्यारी से मिलने पहुंचे। जिसको लेकर अटकलों का दौर शुरू हो गया।
बता दें कि सीएम धामी और प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट कैबिनेट विस्तार के संकेत दे चुके हैं। हालांकि कैबिनेट विस्तार को डेमेज कंट्रोल से जोड़कर देखा जा रहा है।
इसके अलावा महेंद्र भट्ट की टीम का भी विस्तार होना है। ऐसे में प्रदेश में सियासी घटनाक्रम तेजी से बदल रहा है। जिसके बाद साफ है कि आने वाले दिनों में प्रदेश की सियासी तस्वीर बदल सकती है।

