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हल्द्वानी/देहरादून। डिजिटल इंडिया के दौर में QR कोड से पेमेंट करना अब आम बात हो गई है।

सब्जी की ठेली, चाय की दुकान, पार्किंग, पब्लिक टॉयलेट से लेकर बड़े शोरूम तक हर जगह QR कोड नजर आता है।

कैशलेस ट्रांजैक्शन ने लोगों की जिंदगी आसान जरूर की है, लेकिन इसी सुविधा का फायदा अब साइबर ठग उठा रहे हैं।

उत्तराखंड समेत देश के कई शहरों में ऐसे मामले सामने आए हैं, जहां QR कोड स्कैन करते ही लोगों के खाते से पैसे उड़ गए। अधिकतर मामलों में लोग जल्दबाजी में बिना जांच-पड़ताल किए QR स्कैन कर देते हैं और चंद सेकंड में उनका बैंक बैलेंस खाली हो जाता है।
नकली QR कोड से हो रहा खेल
स्कैमर्स भीड़भाड़ वाली जगहों पर लगे असली QR कोड को हटाकर उसकी जगह अपना नकली QR स्टिकर चिपका देते हैं। बाहर से देखने में दोनों में कोई खास फर्क नहीं दिखता। लोग मामूली रकम चुकाने के लिए जैसे ही QR स्कैन करते हैं, उनके सामने PIN डालने या पेमेंट कन्फर्म करने का विकल्प आ जाता है।
कई बार लोग इसे नया प्रोसेस समझकर UPI पिन डाल देते हैं और अनजाने में खुद ही ठगों को पैसे भेज देते हैं। जब खाते से रकम कटती है, तब जाकर ठगी का एहसास होता है।
‘पैसे पाने के लिए QR स्कैन करें’ सबसे बड़ा झूठ
साइबर एक्सपर्ट्स बताते हैं कि किसी से पैसे रिसीव करने के लिए QR स्कैन करने या UPI पिन डालने की जरूरत ही नहीं होती। ठग OLX जैसी वेबसाइटों पर खरीदार बनकर लोगों से संपर्क करते हैं और एडवांस पेमेंट के नाम पर QR कोड भेज देते हैं।
QR स्कैन करते ही पीड़ित का पैसा खाते से कट जाता है। कुछ मामलों में QR कोड लोगों को फर्जी वेबसाइट या नकली ऐप पर ले जाता है, जिससे मोबाइल में वायरस या मैलवेयर तक चला जाता है।

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