हल्द्वानी। फतेहपुर रेंज में आतंक का पर्याय बन चुका बाघ आखिरकार 20वें दिन वन विभाग के शिकंजे में आ गया। मंगलवार रात करीब 10:30 बजे पनियाली गांव से सटे जंगल में बाघ को ट्रैंकुलाइज कर रेस्क्यू किया गया। इसके बाद उसे रामनगर स्थित ढेला रेस्क्यू सेंटर भेज दिया गया।
बताया जा रहा है कि 12 फरवरी को पीपलपोखरा गांव की गंगा देवी और 25 फरवरी को पनियाली गांव की कमला फर्त्याल को जंगल में घास काटने के दौरान मारने वाला यही बाघ था। पिछले 20 दिनों से यह बाघ वन विभाग के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ था।
मंगलवार रात वन विभाग की टीम मचान के पास तैनात थी। तभी बाघ की मूवमेंट नजर आई। करीब 10 बजे कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के वरिष्ठ पशु चिकित्साधिकारी डॉ. दुष्यंत शर्मा ने बाघ के लगभग 30 मीटर की दूरी पर आते ही ट्रैंकुलाइजर गन से सटीक निशाना साधा। डार्ट लगने के बाद बाघ वहां से भागा और करीब 20 मीटर दूर जाकर बेहोश होकर गिर गया। टीम ने सर्च ऑपरेशन चलाकर उसे झाड़ियों में ढूंढ निकाला और सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया।
डीएनए परीक्षण से होगी पुष्टि
वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, पकड़ा गया बाघ ही दोनों महिलाओं की मौत का जिम्मेदार हो सकता है, क्योंकि हाल के दिनों में इसी बाघ की लगातार मूवमेंट दर्ज की गई थी। हालांकि अंतिम पुष्टि के लिए बाघ का डीएनए परीक्षण कराया जाएगा।
60 कर्मचारियों की टीम थी तैनात
बाघ को पकड़ने के लिए वन विभाग के करीब 60 कर्मचारी दिन-रात जुटे थे। पीपलपोखरा से पनियाली तक पांच पिंजरे और 58 ट्रैप कैमरे लगाए गए थे। दो मचानों पर ट्रैंकुलाइजर के साथ टीमें तैनात थीं।
बाघ को जाल में फंसाने के लिए एक भैंसा भी बांधा गया था। सोमवार को बाघ मचान के पास बंधे भैंसे को मारकर खा गया, लेकिन टीम उसे ट्रैंकुलाइज नहीं कर पाई और वह चकमा देकर निकल गया।
हालांकि मंगलवार रात दूसरे मचान के पास उसे सफलतापूर्वक बेहोश कर काबू में कर लिया गया।
फिलहाल बाघ को निगरानी में रखा गया है और डीएनए रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।





