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हल्द्वानी। कुमाऊं कमिश्नर दीपक रावत की जनसुनवाई के दौरान एक चौंकाने वाला साइबर ठगी का मामला सामने आया, जिसने डिजिटल लेनदेन की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

मामला देवलचौड़ स्थित जय महालक्ष्मी ज्वेलर्स से जुड़ा है, जहां आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल कर करीब 13 लाख रुपये के गहनों की ठगी को अंजाम दिया गया।

ज्वेलर्स के स्वामी अतुल वर्मा ने कमिश्नर को बताया कि उनके कर्मचारी हिमांशु चंद्र ने ही इस वारदात को अंजाम दिया। आरोपी ने मोबाइल पर भुगतान का फर्जी ‘सक्सेसफुल’ स्क्रीनशॉट दिखाकर विश्वास जीत लिया, जबकि वास्तविकता में दुकान के खाते में एक भी रुपया ट्रांसफर नहीं हुआ था। इस तरह बिना किसी जबरदस्ती, ताला तोड़े या सेंधमारी के, केवल डिजिटल चालबाजी से लाखों की ठगी कर ली गई।

मामले की गंभीरता को देखते हुए कुमाऊं कमिश्नर दीपक रावत ने तुरंत कड़ा रुख अपनाते हुए टीपी नगर चौकी इंचार्ज को तकनीकी जांच के निर्देश दिए हैं। उन्होंने साफ कहा कि अगली जनसुनवाई में आरोपी की पेशी और पूरे मामले की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए।

यह घटना इस बात का संकेत है कि अब अपराधी पारंपरिक हथियारों की बजाय डिजिटल टूल्स और एडिटिंग ऐप्स का इस्तेमाल कर रहे हैं। एक फर्जी स्क्रीनशॉट के जरिए व्यापारी को भ्रमित कर बड़ी ठगी को अंजाम देना साइबर अपराध के नए ट्रेंड को दर्शाता है।

प्रशासन और पुलिस ने व्यापारियों से सतर्क रहने की अपील की है। खासतौर पर डिजिटल पेमेंट के मामलों में केवल स्क्रीनशॉट के आधार पर भरोसा न करें, बल्कि बैंक से प्राप्त कन्फर्मेशन मैसेज और खाते में वास्तविक राशि की पुष्टि के बाद ही सामान सौंपें।

यह मामला न केवल स्थानीय व्यापारियों के लिए चेतावनी है, बल्कि डिजिटल लेनदेन करने वाले हर व्यक्ति को सावधान रहने की जरूरत को भी रेखांकित करता है।

अब देखना होगा कि पुलिस इस साइबर ठगी के आरोपी तक कितनी जल्दी पहुंच पाती है और इस नए तरीके के अपराध पर किस तरह अंकुश लगाया जाता है।

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