पंतनगर। एक निजी कंपनी और उसके निदेशकों पर बैंक से करोड़ों रुपये का लोन लेकर धोखाधड़ी करने का गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि कंपनी ने बंधक रखी प्लांट और मशीनरी को गायब कर बैंक को भारी आर्थिक नुकसान पहुंचाया।
मामले में न्यायालय के आदेश पर थाना पंतनगर में मैसर्स रुद्रा ऑटो टेक इंजीनियरिंग प्रा.लि. और उसके निदेशकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।
पुलिस के अनुसार दि नैनीताल बैंक लिमिटेड, शाखा रुद्रपुर के वरिष्ठ शाखा प्रबंधक अपूर्व पाण्डेय ने न्यायालय में दिए प्रार्थना पत्र में बताया कि कंपनी ने वर्ष 2016 में कैश क्रेडिट और टर्म लोन के माध्यम से प्लांट और मशीनरी खरीदने के लिए करीब 77 करोड़ 8 लाख रुपये का ऋण लिया था।
ऋण की किस्तें समय पर न चुकाने पर वर्ष 2019 में खाते को एनपीए घोषित कर दिया गया। इसके बाद बैंक ने सरफेसी एक्ट के तहत कार्रवाई करते हुए जिला मजिस्ट्रेट और नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल, इलाहाबाद से अपने पक्ष में आदेश प्राप्त किए।
बताया गया कि 11 जून 2024 को बैंक अधिकारियों और आईआरपी टीम द्वारा कंपनी परिसर का निरीक्षण किया गया, जहां बंधक रखी प्लांट, मशीनरी और स्टॉक गायब मिला। आरोप है कि कंपनी के निदेशकों ने आपराधिक षड्यंत्र के तहत बिना अनुमति बंधक संपत्ति को हटा दिया, जिससे बैंक को करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ।
बैंक प्रबंधन का कहना है कि पहले थाना पंतनगर और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को शिकायत दी गई थी, लेकिन कार्रवाई नहीं होने पर न्यायालय की शरण लेनी पड़ी।
थाना प्रभारी नंदन सिंह रावत ने बताया कि न्यायालय के आदेश पर मुकदमा दर्ज कर लिया गया है और मामले की गहन जांच की जा रही है।

