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हल्द्वानी। एक ओर देशभर में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के दावे किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर उत्तराखंड के सरकारी जूनियर हाईस्कूलों में अंग्रेजी विषय के शिक्षक तक स्वीकृत नहीं हैं।

प्रदेश के किसी भी जूनियर हाईस्कूल में अंग्रेजी शिक्षक का पद सृजित न होने से कक्षा 6 से 8 तक पढ़ने वाले हजारों छात्र-छात्राओं की अंग्रेजी शिक्षा प्रभावित हो रही है।

जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ का कहना है कि बिना अंग्रेजी शिक्षक के बच्चे हर वर्ष आठवीं कक्षा उत्तीर्ण कर रहे हैं, जिससे शिक्षा की गुणवत्ता लगातार गिरती जा रही है। संघ लंबे समय से सरकार से जूनियर हाईस्कूलों में अंग्रेजी शिक्षक नियुक्त करने की मांग कर रहा है, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।

संघ का आरोप है कि सरकार शिक्षकों और छात्रों की समस्याओं को नजरअंदाज कर रही है, जिसके चलते उन्हें छात्र हित में सड़कों पर उतरकर आंदोलन करने को मजबूर होना पड़ रहा है।

जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर सरकार से शीघ्र कार्रवाई की मांग की है। प्रमुख मांगों में शिक्षकों को टीईटी परीक्षा की अनिवार्यता से मुक्त करना, 17,140 वेतनमान का लाभ देना, पूरी सेवा में तीन पदोन्नतियां सुनिश्चित करना, पुरानी पेंशन योजना लागू करना, जूनियर हाईस्कूलों में अंग्रेजी विषय के पद सृजित करना और अंतर्जनपदीय स्थानांतरण की सुविधा देना शामिल है।

इसके अलावा 5400 ग्रेड वेतन प्राप्त कर रहे शिक्षकों को बोनस भुगतान अथवा राजपत्रित अधिकारी घोषित करने की मांग भी उठाई गई है।

जिला मंत्री जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ नैनीताल डॉ. डी.एन. भट्ट ने कहा कि यदि सरकार जल्द मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लेती है तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

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