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ब्रेकिंग न्यूज : नैनीताल में नगर पालिका सभासदों ने ₹100 टोल टैक्स को लेकर इसका विरोध जताया

धारा-34 के तहत कार्रवाई की मांग, हाईकोर्ट जाने की चेतावनी; चेयरमैन बोलीं- सभी निर्णय बोर्ड में ही हुए, सरकार के गजट के अनुसार लागू हुआ शुल्क

रिपोर्टर गुड़डू सिंह ठठोला

धारा-34 के तहत कार्रवाई की मांग, हाईकोर्ट जाने की चेतावनी; चेयरमैन बोलीं- सभी निर्णय बोर्ड में ही हुए, सरकार के गजट के अनुसार लागू हुआ शुल्क

नैनीताल। नैनीताल नगर पालिका परिषद में दोपहिया वाहनों से ₹100 प्रवेश शुल्क (चुंगी टैक्स) वसूली के फैसले को लेकर सियासी और प्रशासनिक विवाद गहरा गया है। नगर पालिका के आठ सदस्यों ने इस निर्णय सहित अन्य मामलों पर कड़ा विरोध जताते हुए बोर्ड के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। बागी सभासदों ने जिलाधिकारी और मंडलायुक्त से उत्तराखंड नगर पालिका अधिनियम की धारा-34 के तहत बोर्ड को भंग करने की मांग करने के साथ ही जरूरत पड़ने पर उच्च न्यायालय की शरण लेने की भी चेतावनी दी है।

गुरुवार को नगर पालिका सभागार में आयोजित प्रेस वार्ता में पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष मुकेश जोशी ‘मोंटू’, वरिष्ठ सभासद भगवत सिंह रावत, गजाला कमाल, जितेंद्र पांडेय ‘जीनू’, अंकित चंद्रा, रमेश चंद्रा और काजल आर्या मौजूद रहे। उन्होंने कहा कि नैनीताल आने वाले बाहरी दोपहिया वाहनों से ₹100 प्रवेश शुल्क वसूलना पूरी तरह अनुचित है। उनका आरोप है कि इस फैसले से देशभर में पर्यटन नगरी नैनीताल की छवि खराब हो रही है और पर्यटकों के बीच गलत संदेश जा रहा है।

पूर्व अध्यक्ष मुकेश जोशी और सभासद जितेंद्र पांडेय ने कहा कि नगर पालिका में कई ऐसे निर्णय लिए जा रहे हैं जिन पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि चुंगी वसूली का ठेका जल्दबाजी में शुरू कर दिया गया, जबकि इस संबंध में बोर्ड की बैठक तक नहीं बुलाई गई। उन्होंने मांग की कि जिलाधिकारी और मंडलायुक्त पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराएं और यदि अनियमितताएं सामने आती हैं तो धारा-34 के तहत बोर्ड को भंग करने की कार्रवाई की जाए।

वहीं, नगर पालिका अध्यक्ष सरस्वती खेतवाल ने सभी आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि आंदोलन कर रहे सभासद स्वयं उन बैठकों का हिस्सा रहे हैं, जिनमें संबंधित प्रस्ताव पारित किए गए थे। उन्होंने कहा कि दोपहिया वाहनों से प्रवेश शुल्क लेने का निर्णय राज्य सरकार के गजट नोटिफिकेशन के आधार पर लागू किया गया है। यह कोई मनमाना फैसला नहीं है।

चेयरमैन ने कहा कि नैनीताल की धंसती हुई मॉल रोड और शहर में बढ़ते वाहनों के दबाव को देखते हुए यातायात नियंत्रित करना आवश्यक हो गया है। प्रवेश शुल्क का उद्देश्य राजस्व बढ़ाने के साथ-साथ शहर में अनावश्यक वाहनों की संख्या कम करना भी है।

नगर पालिका में प्रवेश शुल्क को लेकर शुरू हुआ यह विवाद अब राजनीतिक और कानूनी रूप लेता नजर आ रहा है। यदि बागी सभासद अपनी घोषणा के अनुसार प्रशासन और न्यायालय का रुख करते हैं तो आने वाले दिनों में यह मामला और अधिक तूल पकड़ सकता है।

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