कोटद्वार। उत्तराखंड की समृद्ध लोक संस्कृति, कृषि परंपरा एवं पर्यावरण संरक्षण के प्रतीक लोकपर्व हरेला के अवसर पर जानकीनगर, कोटद्वार स्थित रितेश शर्मा सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज में हरेला सप्ताह के अंतर्गत वृहद वृक्षारोपण अभियान एवं भाषण प्रतियोगिता का आयोजन उत्साह एवं गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ।
विद्यालय के परीक्षा एवं मीडिया प्रभारी आचार्य रोहित बलोदी ने जानकारी देते हुए बताया कि विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान एवं भारतीय शिक्षा समिति, उत्तराखंड के संयुक्त तत्वावधान में संपूर्ण प्रदेश के सरस्वती शिशु एवं विद्या मंदिरों में हरेला सप्ताह के दौरान पर्यावरण संरक्षण एवं भारतीय संस्कृति के संवर्धन हेतु विविध रचनात्मक गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है। इसी क्रम में हरेला पर्व के मुख्य दिवस पर विद्यालय के समस्त छात्र-छात्राओं ने अवकाश होने के कारण अपने-अपने अभिभावकों के साथ अपने निवास स्थान पर विभिन्न प्रजातियों के औषधीय, छायादार एवं फलदार पौधों का रोपण कर प्रकृति संरक्षण का संकल्प लिया तथा समाज को “एक विद्यार्थी–एक पौधा” का प्रेरणादायी संदेश दिया।
हरेला सप्ताह के द्वितीय दिवस पर आयोजित भाषण प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने हरेला पर्व के सांस्कृतिक, सामाजिक एवं पर्यावरणीय महत्व पर अपने विचार प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किए। प्रतियोगिता में कक्षा 6 से 8 के लिए “उत्तराखंड का लोक पर्व–हरेला”, कक्षा 9 एवं 10 के लिए “हरेला और पर्यावरण संरक्षण” तथा कक्षा 11 एवं 12 के लिए “हरेला : देवभूमि की समृद्ध कृषि परंपरा एवं लोकसंस्कृति का द्योतक” विषय निर्धारित किए गए।
प्रतियोगिता के परिणामों में सब जूनियर वर्ग में अनुष्का नैथानी ने प्रथम, आराध्या बिष्ट ने द्वितीय तथा नक्ष ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। जूनियर वर्ग में केशव ने प्रथम, आस्था ने द्वितीय तथा अपर्णा ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। सीनियर वर्ग में नवीन सिंह ने प्रथम, अभिनव नेगी ने द्वितीय तथा आकांक्षा एवं तन्वी ने संयुक्त रूप से तृतीय स्थान प्राप्त कर उत्कृष्ट वक्तृत्व कौशल का परिचय दिया।
कार्यक्रम का सफल संयोजन साक्षी अग्रवाल एवं पूनम नेगी ने किया, जबकि प्रतियोगिता का निष्पक्ष मूल्यांकन नंदिनी नैथानी, संगीता कुकशाल एवं सुबोध ध्यानी द्वारा किया गया।
कार्यक्रम के समापन अवसर पर विद्यालय के प्रधानाचार्य मनोज कुकरेती एवं विद्यालय प्रबंध समिति के सदस्य अनिल कोटनाला ने सभी प्रतिभागियों को शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि हरेला केवल एक पर्व नहीं, बल्कि प्रकृति, पर्यावरण, कृषि एवं हमारी सांस्कृतिक विरासत के प्रति कृतज्ञता और संरक्षण का उत्सव है। उन्होंने विद्यार्थियों से अपने जीवन में अधिकाधिक वृक्षारोपण करने, उनकी नियमित देखभाल करने तथा पर्यावरण संरक्षण को जन-आंदोलन बनाने का आह्वान किया।
कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों में पर्यावरण संरक्षण, प्रकृति प्रेम एवं उत्तराखंड की समृद्ध लोक संस्कृति के प्रति जागरूकता का प्रभावी संदेश प्रसारित किया गया।


